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Unacademy की PrepLadder के खिलाफ मेडिकल टीचर्स का हल्लाबोल, दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई, ये है पूरा मामला

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी (Unacademy) की सब्सिडियरी प्रीपलैडर (PrepLadder) के खिलाफ कई टीचर्स ने मिलकर कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। बकाए को लेकर कई टीचर्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसने सॉफ्टबैंक के निवेश वाली एडुटेक यूनिकॉर्न के सामने एक और दिक्कत खड़ी कर दी है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 16, 2023 पर 7:06 PM
Unacademy की PrepLadder के खिलाफ मेडिकल टीचर्स का हल्लाबोल, दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई, ये है पूरा मामला
PrepLadder की शुरुआत वर्ष 2015 में दीपांशु गोयल, साहिल गोयल और वितुल गोयल ने की थी। यह NEET PG exams की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए रिकॉर्डेड कंटेट उपलब्ध कराती है। Unacademy ने जितनी भी कंपनियों का अधिग्रहण किया है, उसमें से सिर्फ अनएकेडमी ही है जिसका रेवेन्यू 50 करोड़ रुपये से अधिक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी (Unacademy) की सब्सिडियरी प्रीपलैडर (PrepLadder) के खिलाफ कई टीचर्स ने मिलकर कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। बकाए को लेकर कई टीचर्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसने सॉफ्टबैंक के निवेश वाली एडुटेक यूनिकॉर्न के सामने एक और दिक्कत खड़ी कर दी है। PrepLadder के एक टीचर डॉ विवेक जैन जो प्रिवेंटिव और सोशल मेडिसिन पढ़ाते हैं, उन्होंने पिछले महीने दिसंबर 2022 में रॉयल्टी फीस के बकाए के लिए कानूनी रास्ता अपनाया था। अब कुछ और टीचर्स ने भी कोर्ट में याचिका दायर किया है।

क्या है पूरा मामला

डॉ जैन के साथ-साथ मेडिकल फील्ड के कुछ अन्य डॉक्टर्स को अपने नोट्स के लिए पैसे नहीं मिले हैं। उन्हें पिछले साल सितंबर 2022 से ही प्रीपलैडर पर बिकने वाले अपने कंटेंट के लिए पैसे नहीं मिले हैं, जब उन्होंने अप्रैल 2023 से कांट्रैक्ट को रद्द करने का फैसला किया। उन्होंने बकाए और चीटिंग के चलते यह कांट्रैक्ट रद्द करने का फैसला किया था। हालांकि दूसरी तरफ प्रीपलैडर इन टीचर्स के पेमेंट्स को रोक तो दिया है लेकिन कंटेट की बिक्री को नहीं रोका है। अनएकेडमी से जुड़े एक स्रोत ने पिछले साल नवंबर में बताया था कि कंपनी ने एंप्लॉयीज को नोटिस भेजा था कि उन्होंने अपना कंटेंट पूरा क्यों नहीं दिया है और इस पर जवाब नहीं आया था जिसके चलते पेमेंट रोका गया था।

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