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Zoho, Juspay और Decentro को RBI से मिला पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस

तीनों कंपनियों को यह मंजूरी 6 फरवरी को दी गई। इससे पहले जनवरी में स्ट्राइप (Stripe), जोमैटो (Zomato) और टाटा पे (Tata Pay) को बैंकिंग रेगुलेटर की तरफ से मंजूरी मिली थी। इसके अलावा, रेजरपे (Razorpay) और कैशफ्री (Cashfree) को पिछले साल लाइसेंस मिला था। रिजर्व बैंक पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस देने में काफी सावधानी बरतता है और उसने इसके लिए उसने काफी सख्त मानक तय कर रखा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 07, 2024 पर 5:56 PM
Zoho, Juspay और Decentro को RBI से मिला पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस
रिजर्व बैंक पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस देने में काफी सावधानी बरतता है।

फिनटेक कंपनियों जसपे (Juspay) व डीसेंट्रो (Decentro) और सॉफ्टवेयर सर्विसेज फर्म जोहो (Zoho) को पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर काम करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से मंजूरी मिल गई है। तीनों कंपनियों को यह मंजूरी 6 फरवरी को दी गई। इससे पहले जनवरी में स्ट्राइप (Stripe), जोमैटो (Zomato) और टाटा पे (Tata Pay) को बैंकिंग रेगुलेटर की तरफ से मंजूरी मिली थी। इसके अलावा, रेजरपे (Razorpay) और कैशफ्री (Cashfree) को पिछले साल लाइसेंस मिला था।

पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिलने से कंपनियां ग्राहकों से पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स स्वीकार कर मर्चेंट्स (ऑनलाइन बिजनेस या ई-कॉमर्स फर्म) को पेमेंट सर्विसेज मुहैया करा सकती हैं। इस प्रोसेस के तहत, पेमेंट एग्रीगेटर ग्राहकों से हासिल फंड की पूलिंग कर उसे एक निश्चित समय के बाद मर्चेंट्स को ट्रांसफर कर देते हैं।

डीसेंट्रो नए बैंकों, मार्केटप्लेस और फिनटेक को अपने APIs के जरिये इंटीग्रेशन और बैंकिंग सॉल्यूशंस मुहैया कराने का मौका देती है, जबकि जसपे पेमेंट गेटवे का काम करती है, जो कार्ड, वॉलेट और UPI आधारित ट्रांजैक्शन की सुविधा देती है। जोहो उन दुर्लभ SaaS फर्मों में है, जिन्हें लंबे समय के इंतजाम के बाद पेमेंट लाइसेंस मिला है।

लाइसेंस के लिए मानक काफी सख्त 

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