सुब्रत रॉय (Subrata Roy) का निधन 14 नवंबर को मुंबई में हो गया। ज्यादातर लोगों को इसके बारे में 15 नवंबर की सुबह पता चला। नींद से उठते ही यह खबर जानकर हैरानी हुई। इसलिए कि लोगों को यह पता नहीं था कि वह बीमार थे और मुंबई के बड़े हॉस्पिटल में भर्ती थे। कारोबार और उद्योग की दुनिया में फर्श से अर्श पर पहुंचने की कई कहानियां आपने सुनी होगी। लेकिन, सुब्रत राय की कहानी कई मायनों में अलग है। सहारा समूह के लाखों एंप्लॉयीज के लिए वह 'सहाराश्री' थे। नाम, शान और रसूख के लिहाज से जो ऊंचाइयां उन्होंने छुई थी, वैसा शायद ही किसी दूसरे उद्योगपति ने छुआ होगा। 75 साल की उम्र में इस दुनिया से जाने का मतलब है कि उन्हें जिंदगी कम नहीं मिली थी। उस जिंदगी को उन्होंने खूब जिया। करोड़ों को प्रेरित किया। लाखों लोगों को रोजीरोटी कमाने के मौके दिए। इंडिया में कई खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद की। लेकिन, सेबी से टकराने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर, अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की रफ्तार थम गई।
