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सुब्रत रॉय : फर्श से अर्श पर पहुंचने की एक अलग और दिलचस्प दास्तान

बिहार के एक छोटे शहर में जन्मे रॉय की शुरुआती पढ़ाई कोलकाता में हुई। लेकिन, करियर की शुरुआत उन्होंने गोरखपुर से की। कई छोटे-मोटे काम करने के बाद उन्होंने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की। कुछ ही सालों में सहारा फाइनेंस का नाम गांव से लेकर शहरों में घर-घर पहुंच गया। सरकारी और निजी बैंक लोगों को जो सुविधा देने में नाकाम थे। वह सुविधा सहारा फाइनेंस ने लोगों को दिया

Rakesh Ranjanअपडेटेड Nov 15, 2023 पर 3:30 PM
सुब्रत रॉय : फर्श से अर्श पर पहुंचने की एक अलग और दिलचस्प दास्तान
सहारा फाइनेंस और उसकी सब्सिडयरी कंपनियों ने लोगों को तय समय पर बचत के पैसे लौटाए। लोगों का भरोसा जमता गया और सुब्रत राय का कारोबारी साम्राज्य बढ़ता गया। तब NBFC के लिए RBI के नियम आज जितने सख्त नहीं थे।

सुब्रत रॉय (Subrata Roy) का निधन 14 नवंबर को मुंबई में हो गया। ज्यादातर लोगों को इसके बारे में 15 नवंबर की सुबह पता चला। नींद से उठते ही यह खबर जानकर हैरानी हुई। इसलिए कि लोगों को यह पता नहीं था कि वह बीमार थे और मुंबई के बड़े हॉस्पिटल में भर्ती थे। कारोबार और उद्योग की दुनिया में फर्श से अर्श पर पहुंचने की कई कहानियां आपने सुनी होगी। लेकिन, सुब्रत राय की कहानी कई मायनों में अलग है। सहारा समूह के लाखों एंप्लॉयीज के लिए वह 'सहाराश्री' थे। नाम, शान और रसूख के लिहाज से जो ऊंचाइयां उन्होंने छुई थी, वैसा शायद ही किसी दूसरे उद्योगपति ने छुआ होगा। 75 साल की उम्र में इस दुनिया से जाने का मतलब है कि उन्हें जिंदगी कम नहीं मिली थी। उस जिंदगी को उन्होंने खूब जिया। करोड़ों को प्रेरित किया। लाखों लोगों को रोजीरोटी कमाने के मौके दिए। इंडिया में कई खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद की। लेकिन, सेबी से टकराने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर, अश्वमेध यज्ञ के घोड़े की रफ्तार थम गई।

करोड़ों लोगों को सेविंग्स की आदत लगाई

बिहार के एक छोटे शहर में जन्मे रॉय की शुरुआती पढ़ाई कोलकाता में हुई। लेकिन, करियर की शुरुआत उन्होंने गोरखपुर से की। कई छोटे-मोटे काम करने के बाद उन्होंने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की शुरुआत की। कुछ ही सालों में सहारा फाइनेंस का नाम गांव से लेकर शहरों में घर-घर पहुंच गया। सरकारी और निजी बैंक लोगों को जो सुविधा देने में नाकाम थे। वह सुविधा सहारा फाइनेंस ने लोगों को दिया। खासकर दिन भर में 100-200 रुपये कमाने वाले लोगों को रोजाना 20-40 रुपये बचाने के मौके दिए। पहले लाखों और फिर करोड़ों लोगों ने सहारा की मदद से रोजाना बचत को अपनी आदत बना ली।

जो काम बैंकों ने नहीं किए वह सहारा फाइनेंस ने किया

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