वेणु श्रीनिवासन ने 4 अप्रैल को बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया। श्रीनिवासन टीवीएस मोटर के मानद चेयरमैन हैं। वह टाटा ग्रुप के 7 ट्रस्टों के वाइस चेयरमैन हैं। उन्होंने इस्तीफ की वजह दूसरे कारोबार से जुड़ी अपनी व्यस्तता बताई है। उनके इस्तीफे से पहले पूर्व ट्रस्टी मेहिल मिस्त्री ने ट्रस्ट के बोर्ड में श्रीनिवासन और दूसरे ट्रस्टी विजय सिंह की मौजूदगी के लिहाज से उनकी एलिजिबिलिटी पर सवाल उठाए थे।
मिस्त्री ने श्रीनिवासन की नियुक्ति पर उठाए हैं सवाल
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास एक ऑब्जेक्शन-अप्लिकेशन फाइल किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि श्रीनिवासन और सिंह के पास कभी ट्रस्ट के बोर्ड में नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यता नहीं थी। इसलिए उन्हें ट्रस्ट डीड के तहत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह भी कहा कि मिस्त्री के अप्लिकेशन में डीडी के क्लॉज 6 और क्लॉज 18 का हवाला दिया गया है। इसके तहत किसी अयोग्य घोषित ट्रस्टी को 'डीम्ड डेड' माने जाने का प्रावधान है।
मिस्त्री ने चैरिटेबल कमिश्नर से जांच की मांग की है
मिस्त्री की सबसे प्रमुख दलील यह है कि श्रीनिवासन और सिंह दोनों कभी पारसी जोरोस्ट्रियन समुदाय के हिस्सा नहीं रहे। दोनों के पास मुंबई का पर्मानेंट रेजिडेंस भी नहीं है। उनका कहना है कि ट्रस्टी बनने के लिए ये दोनों जरूरी शर्तें हैं। इस आधार पर उन्होंने राज्य के चैरिटी कमिश्नर से मामले की जांच करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी ट्रस्टीज को अपनी योग्यता की पुष्टि के लिए शपथनामा पेश करने का निर्देश दिया जाए।
बाई हीराबाई ट्रस्ट की स्थापना 1923 में हुई थी
इस विवाद के केंद्र में जो ट्रस्ट है, उसका नाम बाई हीराबाई जमसेतजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन (BHJTNCI) है। इसकी स्थापाना 1923 में हुई थी। टाटा ट्रस्ट्स की वेबसाइट के मुताबिक, यह परोपकार से जुड़ी संस्था है, जिसका फोकस गुजरात के नवसारी में पारसी और इस समुदाय के कल्याण पर है। इसके कार्यक्षेत्र में एजुकेशन से लेकर हेल्थकेयर तक शामिल हैं।
मिस्त्री वाइस चेयरमैन का पद खत्म करने का प्रस्ताव पेश कर चुके हैं
यह पहली बार नहीं है जब मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट ईकोसिस्टम के अंदर गवर्नेंस को लेकर सवाल उठाए हैं। इस साल फरवरी में उन्होंने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) के बोर्ड के सदस्य के रूप में एक अलग मसला उठाया था। उन्होंने सभी टाटा ट्रस्ट्स में वाइस-चेयरमैन का पद खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने दलील दी थी कि ट्रस्ट की डीड में इस पोजीशन का कोई प्रावधान नहीं है। श्रीनिवासन के इस्तीफे से टाटा ट्रस्ट्स के स्ट्रक्चर के अंदर चल रही खींचतान में एक नया मोड़ आ गया है।