ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने कहा है कि एलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला की भारत में एंट्री से मारुति सुजुकी, हुंडई मोटर्स और टाटा मोटर्स सहित अन्य घरेलू व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। टेस्ला का सबसे सस्ता कार मॉडल अमेरिका में 35,000 डॉलर (30 लाख रुपये से अधिक) में बिकता है। CLSA ने अपने नोट में बताया है कि यह भारत में कारों के एवरेज सेलिंग प्राइस लगभग 12 लाख रुपये से काफी अधिक है। ब्रोकरेज ने कहा कि ऊंची कीमतों के साथ-साथ टेस्ला कारों पर 110 प्रतिशत तक का काफी अधिक आयात शुल्क (Import Duty) भी लगेगा।
हालांकि, इसमें कमी आ सकती है क्योंकि नई ईवी पॉलिसी के दिशानिर्देशों में इंपोर्ट ड्यूटी को घटाकर 15 प्रतिशत किए जाने की उम्मीद है। फिर भी CLSA का मानना है कि रोड टैक्स, बीमा और अन्य लागतों को ऑन-रोड कीमत में जोड़ने से टेस्ला की कार का मिनिमम प्राइस 35 लाख रुपये से अधिक रहेगा।
CLSA ने कहा, "हमारा मानना है कि अगर टेस्ला अपने मॉडल 3 को महिंद्रा XEV 9e, हुंडई ई-क्रेटा, मारुति सुजुकी ई-विटारा आदि जैसे मॉडलों की तुलना में लगभग 20-50 प्रतिशत अधिक ऑन-रोड कीमत पर पेश करती है, तो इससे घरेलू ईवी मॉडलों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हमारे विचार में पावरट्रेन की परवाह किए बिना, कार खरीदने के फैसले में शानदार इंटीरियर, फीचर्स, एस्थेटिक्स, बेहतर रीसेल वैल्यू विजिबिलिटी और सही कीमत जैसे फैक्टर प्रमुख होते हैं।"
टेस्ला के इंडिया मॉडल्स में हो सकता है काफी समझौता
अगर टेस्ला भारतीय बाजार के हिसाब से 22 लाख रुपये से कम कीमत का इलेक्ट्रिक व्हीकल लॉन्च करती है, तो CLSA को लगता है कि विदेशों में इसके ट्रेडिशनल मॉडलों के मुकाबले फीचर्स और स्पेसिफिकेशन में काफी समझौता किया जाएगा। इसलिए भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां आकर्षक फीचर्स और कॉम्पिटीटिव प्राइसिंग की पेशकश कर रही हैं। ऐसे में CLSA को टेस्ला की भारत में लॉन्चिंग से घरेलू मैन्युफैक्चरर्स के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं लगता है। ब्रोकरेज का कहना है कि अगर हम यह मानें कि इंपोर्ट ड्यूटी को लगभग 15-20 प्रतिशत तक कम किया जाता है, फिर भी टेस्ला कारों की कीमत मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई मोटर्स इंडिया जैसी घरेलू कंपनियों की 4 मीटर से अधिक लंबी इलेक्ट्रिक SUV से ज्यादा होगी।
CLSA ने कहा, "हमारा मानना है कि टेस्ला को अपने मौजूदा पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग स्थापित करने की जरूरत होगी और अपने व्हीकल्स की ऑन रोड कीमत 35-40 लाख रुपये से कम रखनी होगी। फिर भले ही इंपोर्ट ड्यूटी 20 प्रतिशत से कम हो जाए।"
अभी EV की भारत में पैठ केवल 2.4 प्रतिशत
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि टेस्ला का इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर फोकस है और इन गाड़ियों की भारत के बाजार में पैठ केवल 2.4 प्रतिशत है। हालांकि यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2028 तक भारत में ईवी की पैठ बढ़कर 15 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2030 तक 25 प्रतिशत हो जाएगी। अगर यह हम मान लें कि टेस्ला वित्त वर्ष 2030 तक ईवी में लगभग 10-20 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी हासिल कर लेती है, तो इसका मतलब है कि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में उसकी हिस्सेदारी लगभग 2-5 प्रतिशत होगी।