अमेरिका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को एक जनरल लाइसेंस जारी किया है। इससे कंपनी को बिना किसी रोक-टोक के सीधे वेनेजुएला का तेल खरीदने की इजाजत मिल जाएगी। यह बात रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कही गई है। इस साल जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया। मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में आपराधिक आरोप तय किए गए हैं और उन्हें आरोपों का सामना करने के लिए शहर लाया गया है। उन पर नार्को-आतंकवाद और ड्रग तस्करी जैसे आरोप हैं।
इस गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि अमेरिका, वेनेजुएला की एनर्जी इंडस्ट्री पर लगी रोक-टोक में ढील देगा ताकि दोनों देशों के बीच 2 अरब डॉलर की तेल सप्लाई डील हो सके। साथ ही वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री के लिए 100 अरब डॉलर के बड़े रिकंस्ट्रक्शन प्लान को आसान बनाया जा सके।
एक जनरल लाइसेंस वेनेजुएला के उस तेल की खरीद, एक्सपोर्ट और बिक्री की इजाजत देता है जिसे पहले ही निकाला जा चुका है। इजाजत में ऐसे तेल की रिफाइनिंग भी शामिल है। रिलायंस इंडस्ट्रीज को लाइसेंस देने से वेनेजुएला का तेल एक्सपोर्ट तेज हो सकता है। वहीं कंपनी के लिए क्रूड ऑयल की लागत कम हो सकती है। रॉयटर्स के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस साल जनवरी की शुरुआत में इस लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था।
वेनेजुएला का तेल रूसी सप्लाई की जगह लेगा
इस महीने की शुरुआत में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ट्रेडर विटोल से 20 लाख बैरल वेनेजुएला का तेल खरीदा। विटोल और ट्रैफिगुरा को मादुरो के पकड़े जाने के बाद लाखों बैरल वेनेजुएला तेल की मार्केटिंग और बिक्री के लिए अमेरिकी लाइसेंस दिए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, एक सोर्स ने कहा है कि वेनेजुएला के तेल की सीधी खरीद से रिलायंस इंडस्ट्रीज को कम खर्च में रूसी तेल को रिप्लेस करने में मदद मिलेगी। वेनेजुएला से हैवी क्रूड ऑयल, डिस्काउंट पर बेचा जाता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज कभी अपने एडवांस्ड रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए वेनेज़ुएला के तेल की रेगुलर खरीदार हुआ करती थी। लेकिन अमेरिकी बैन की वजह से 2025 की शुरुआत में इसे खरीद बंद करनी पड़ी। रिलायंस इंडस्ट्रीज 2 रिफाइनरी चलाती है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन है।
रूसी तेल को लेकर अमेरिका भारत से हटा चुका है 25 प्रतिशत टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारतीय सामान पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ 7 फरवरी से हटा दिया। अमेरिका ने रूस से तेल की खरीद को लेकर सजा के तौर पर भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर अगस्त 2025 में 25 प्रतिशत का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर टैरिफ की दर 25 प्रतिशत के रेसिप्रोकल टैरिफ को मिलाकर 50 प्रतिशत हो गई थी। लेकिन अब अमेरिका ने 25 प्रतिशत का एक्स्ट्रा टैरिफ तो हटा ही दिया है, साथ ही ट्रेड डील के तहत भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ की दर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है।