कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने 2 फरवरी को गुटबंदी में शामिल 5 टायर कंपनियों पर जुर्माना लगाया था। इन 5 कंपनियों में MRF, अपोलो टायर्स, बिड़ला टायर्स, जेके टायर्स और CEAT शामिल हैं। CCI ने इन कंपनियों पर कुल 1788.06 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसकी वजह से गुरुवार सुबह शेयर बाजार में टायर कंपनियों में मामूली गिरावट नजर आई।
3 फरवरी को सुबह 10.30 बजे CEAT के शेयर 0.75% नीचे 1087.05 रुपए पर ट्रेड कर रहे थे। JK Tyres के शेयर 1.72% नीचे 133.95 रुपए पर ट्रेड कर रहे थे। Apollo Tyres का शेयर प्राइस 0.16% नीचे 225 रुपए पर ट्रेड कर रहे हैं। बिड़ला टायर्स के शेयर 3.08% नीचे 25.20 रुपए पर ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि MRF के शेयर 0.25% तेजी के साथ 71,640 रुपए पर ट्रेड कर रहे थे।
CCI ने बताया कि अपोलो टायर्स (Apollo Tyres) पर 425.53 करोड़ रुपये, MRF लिमिटेड (MRF Ltd) पर 622.09 करोड़ रुपये, CEAT लिमिटेड (CEAT Ltd) पर 252.16 करोड़ रुपये, JK टायर (JK Tyre) पर 309.95 करोड़ रुपये और बिड़ला टायर्स (Birla Tyres) पर 178.33 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
CCI ने बताया, "इन टायर कंपनियों ने अपने एक टायर एसोसिएशन, ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) के जरिए आपस में कीमतों से जुड़े संवेदनशील आंकड़े साझा किए और उसके आधार टायर की कीमतों पर सामूहिक रूप से तय किया।"
CCI ने कहा कि इन पांचों टायर कंपनियों और ATMA को कॉम्पिटीशन एक्ट की धारा 3 के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया है। यह धारा कंपनियों के बीच गुटबंदी के जरिए कॉम्पिटीशन को खत्म करने वाले समझौतों से जुड़ी है। टायर कंपनियों के अलावा ATMA पर भी 0.084 करोड़ रुपये का जुर्मान लगाया गया है।
CCI ने कहा, "आयोग ने यह भी पाया कि ATMA ने टायर के उत्पादन, घरेलू बिक्री और एक्सपोर्ट से जुड़े आंकड़ों को कंपनी के आधार और सेगमेंट के आधार पर जुटाया और इसे इन कंपनियों के साथ साझा किया गया।"
CCI ने कहा, "ATMA को अपनी सदस्य टायर कंपनियों के जरिए या किसी दूसरे तरीके से टायरों की बिक्री से जुड़े होलसेल और रिटेल आंकड़े जुटाने से खुद को अलग करने का निर्देश दिया गया है।"
यहां यह भी बताना जरूरी है CCI ने इन पांचों टायर कंपनियों और ATMA के खिलाफ यह आदेश अगस्त 2018 में दिया था। लेकिन टायर कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में जाने का फैसला किया, जिसके चलते इसे तबसे सीलबंद करके रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 28 जनवरी को टायर कंपनियों की याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद अब CCI ने यह आदेश जारी किया है।