संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने मौजूदा साल 2023 में दुनिया की आर्थिक ग्रोथ (Global Economic Growth) की रफ्तार धीमी होकर 1.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इसके पीछे उसने यूक्रेन युद्ध के चलते पैदा हुए फूड और एनर्जी संकट, कोरोना महामारी के असर, महंगाई की ऊंची दर और क्लाइमेट इमरजेंसी को प्रमुख वजह बताया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इसके साथ ही भारत (India) की आर्थिक स्थिति की तारीफ और कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी में भारत फिलहाल एक आकर्षक स्थल है और इसकी जीडीपी ग्रोथ रेट (GDP Growth Rate) इस साल 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है।
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि 2024 में यानी अगले साल 6.7% आर्थिक ग्रोथ रेट हासिल करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह ग्रोथ रेट G-20 देशों की तुलना में काफी ऊंची है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को 'ग्लोबल इकॉनॉमिक आउटलुक 2023' को जारी अपनी एक रिपोर्ट में ये बातें कहीं।
संयुक्त राष्ट्र के इकोनॉमिक और सोशल अफेयर्स डिपार्टमेंट के अर्थशास्त्री हामिद राशिद ने कहा, "बाकी दक्षिण एशियाई देशों में जहां आर्थिक ग्रोथ को लेकर स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। वहीं भारत की आर्थिक ग्रोथ के मजबूत रहने की उम्मीद है। यह दुनिया में सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओ में से एक है और साल 2024 में भारत की ग्रोथ रेट 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”
भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूती के पीछे रहे ये कारण
भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक सवाल के जवाब में राशिद ने भारत की मौजूदा आर्थिक मजबूती के लिए तीन कारणों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत में बेरोजगारी दर पिछले चार साल में भारी गिरावट के साथ 6.4 प्रतिशत रह गई। इसका मतलब है कि घरेलू मांग बहुत मजबूत है।
राशिद ने कहा कि भारत में महंगाई दबाव भी काफी कम हुआ है और इसके इस साल करीब 5.5 प्रतिशत तथा 2024 में पांच प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि देश के केंद्रीय बैक को मौद्रिक नीति के मोर्चे पर आक्रामक रुख अपनने की जरूरत नहीं होगी।
अगले साल 2.7% हो सकती है ग्लोबल ग्रोथ
संयुक्त राष्ट्र ने साल 2023 में ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान 3 फीसदी से घटाकर 1.9 फीसदी कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो यह पिछले दशकों की सबसे कम ग्रोथ रेट होगी। हालांकि 2024 में इसने ग्लोबल डिमांग में थोड़ी तेजी आने की उम्मीद है और अगले साल ग्लोबल जीडीपी के 2.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।