मेटल और माइनिंग सेक्टर की कंपनी Vedanta Resources Ltd के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने जेपी ग्रुप की दिवालिया कंपनी Jaiprakash Associates की खरीद प्रक्रिया पर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी को Jaiprakash Associates के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया। अग्रवाल ने X पर पोस्ट कर यह बात कही और साफ किया कि वेदांता अब इस मामले को कानूनी रास्ते से चुनौती देगी।
‘हमें लिखित में मिली थी जीत की जानकारी’
अग्रवाल के मुताबिक- यह पूरी प्रक्रिया IBC के तहत कर्जदाताओं की कमेटी (CoC) द्वारा सार्वजनिक नीलामी के जरिए हुई थी। इसमें कई कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन धीरे-धीरे बाकी बाहर हो गईं और Vedanta सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी बनकर सामने आई।
उन्होंने कहा कि वेदांता को लिखित में बताया गया था कि वह जीत गई है, और यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया थी। लेकिन कुछ दिनों बाद अचानक फैसला बदल दिया गया। इसकी डिटेल उन्होंने साझा नहीं की और कहा कि यह मामला अब सही मंच पर रखा जाएगा।
जयप्रकाश गौर से पुरानी मुलाकात का जिक्र
अग्रवाल ने इस पूरे मामले को Jaiprakash Associates के फाउंडर जयप्रकाश गौर से अपनी पुरानी मुलाकात से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि कई साल पहले लंदन में गौर ने उनसे अपने बनाए बिजनेस के भविष्य को लेकर बात की थी।
अग्रवाल ने कहा कि जयप्रकाश गौर की बस एक ही इच्छा थी कि कंपनी सही हाथों में जाए और आगे बढ़े। उस समय Vedanta ने इसमें आगे कदम नहीं बढ़ाया था, लेकिन बाद में यही मौका फिर आया जब कंपनी दिवाला प्रक्रिया में गई।
गीता का हवाला: ‘बिना लगाव के आगे बढ़ेंगे’
अग्रवाल ने भगवद गीता का जिक्र करते हुए कहा कि वेदांता इस मामले को बिना किसी लगाव के आगे बढ़ाएगी। उनका कहना था कि अगर किसी चीज को धर्म के तहत तय किया गया है, तो उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि Vedanta अपने तथ्य सही तरीके से रखेगी और उचित रास्ता अपनाएगी।
Adani Enterprises को मिली मंजूरी
इस बीच Adani Enterprises की बोली को NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को मंजूरी दे दी है और उसे सफल रिजॉल्यूशन एप्लिकेंट माना गया। Vedanta ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी है, जिससे अब मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया है।
ज्यादा रकम के बावजूद Vedanta पीछे क्यों
Adani Enterprises को नवंबर 2025 में 14,535 करोड़ रुपये की बोली के साथ कर्जदाताओं की मंजूरी मिली थी। इस प्रक्रिया में Vedanta के अलावा Dalmia Cement, Jindal Power और PNC Infratech जैसी कंपनियां भी शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Vedanta की कुल बोली करीब 16,000 करोड़ रुपये थी, जो ज्यादा थी।
इसके बावजूद कर्जदाताओं ने Adani की योजना को इसलिए चुना क्योंकि उसमें 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का अग्रिम भुगतान और कम समय में पूरा भुगतान करने की शर्त थी।