माइनिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Vedanta स्टील बिजनेस से बाहर निकलना चाहती है। कंपनी ने Electrosteel Steels को बेचने का प्लान बनाया है। दरअसल, कंपनी अपने माइनिंग और इंडस्ट्रियल बिजनेस पर फोकस करना चाहती है। वह कर्ज के बोझ को भी घटाना चाहती है। कंपनी पर 11.7 अरब डॉलर का कर्ज है। इकोनॉमिक टाइम्स ने 15 को यह खबर दी है।
बताया जाता है कि वेदांता ने इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को बेचने के लिए AcrelorMittal Nippon Steel (AMNS), Tata Steel, JSW Jindal और Steel and Power से संपर्क किया है।
Vedanta जून 2008 में टाटा स्टील को पीछे छोड़ते हुए ESL का अधिग्रहण 5,320 करोड़ रुपये में करने में कामयाब रही थी। उस साल टाटा स्टील के भूषण स्टील का कंट्रोल लेने के बाद इनसॉल्वेंसी प्रोसेस पूरा करने वाली Electrosteel दूसरी कंपनी थी। इस अधिग्रहण के साथ वेदांता ने स्टील बिजनेस के क्षेत्र में कदम रखा था।
दिसंबर 2018 में वेदांता ने इलेक्ट्रोस्टील में 4 अरब डॉलर का निवेश किया था। इससे कंपनी की क्षमता सालाना 15 लाख टन से बढ़कर सालाना 70 लाख टन हो गई थी।
इस साल मई में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की कोलकाता बेंच ने कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों को कुछ ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के क्लेम्स पर विचार करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि मामले से जुड़े सभी पक्षों के हितों में संतुलन के लिए कई ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के पेमेंट का फिर से आंकलन करने की जरूरत है। कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स को इस बारे में सोचना चाहिए।
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टील बिजनेस से बाहर निकलने के वेदांता के फैसले की एक वजह दुनिया पर मंडराता मंदी का खतरा और कमोडिटी पर आने वाली अतिरिक्त कॉस्ट हो सकती है।