भारत के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 12 साल की जांच-पड़ताल के बाद ऑटो कंपनी फॉक्सवैगन पर 1.4 अरब डॉलर बकाया टैक्स की मांग की है। ऐसे में भारत में विदेशी कंपनियों की निवेश योजनाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि लंबी जांच-पड़ताल के डर से ये कंपनियां भारत में निवेश का अपना फैसला टाल सकती हैं।
एक एनालिसिस के मुताबिक, मारुति सुजुकी, हुंडई, होंडा और टोयोटो जैसी कंपनियों इनकम टैक्स, कस्टम और अन्य भुगतान के विवाद में कुल 6 अरब डॉलर की मांग का सामना कर रही हैं। बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नियमों को आसान बनाने और ब्यूरोक्रेसी संबंधी बाधाओं को खत्म करने का वादा कर विदेशी निवेशकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली टैक्स संबंधी जांच निवेशकों के लिए चिंता की बात है। ऐसे मामले वर्षों तक चलते हैं।
ऐसे ही एक बड़े मामले में टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन ने तकरीबन दशक भर की कानूनी लड़ाई के बाद पिछली तारीख से 2 अरब डॉलर का टैक्स लगाए जाने के मामले में मुकदमा जीता था। अब फॉक्सवैगन ने 1.4 अरब डॉलर टैक्स के मामले में भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा करने का फैसला किया है। टैक्स सलाहकारों और वकीलों का कहना है कि उन्हें क्लाइंट्स की तरफ से असहज करने वाले सवालों से जूझना पड़ रहा है कि किस तरह से इतने पुराने टैक्स के मामले परेशानी का कारण बन सकते हैं।
कई वर्षों से चल रहे केस के लिए माफी योजना की मांग भी चल रही है। दरअसल, भारत सरकार ने 1 फरवरी को कस्टम शिपमेंट्स की समीक्षा के लिए 3 साल का विंडो भी तय किया है। हालांकि, इस नियम में अरबों डॉलर के चल रहे पुराने विवादों को शामिल नहीं किया गया है। ग्लोबल लॉ फर्म डीएलए पाइपर में टैक्स एसोसिएट अमेय दधीच ने बताया, 'सरकार ने इस समस्या को पहचानते हुए दुरुस्त करने की कोशिश की, लेकिन टैक्स डिमांड के पुराने नोटिसों को किसी का फायदा मिलने की संभावना नहीं है।' उन्होंने कहा, 'इस तरह की घटनाओं से विदेशी कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने में संकोच होगा।'