IMF की गीता गोपीनाथ ने कहा, 'शेयर बाजारों में जारी रहेगी गिरावट; मंहगाई रोकने के लिए अभी और बढ़ाने होंगे ब्याज दर'

IMF की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने सोमवार को कहा कि महंगाई को काबू में करने के लिए बैंकों को ब्याज दर में अभी और बढ़ोतरी करनी होगी

अपडेटेड May 23, 2022 पर 8:09 PM
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गीता गोपीनाथ, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने सोमवार को खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी महंगाई मौजूदा स्तर से अभी और ऊपर जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है और वह किसी भी तरह की अस्थिरता को बेहतर तरीके से संभालने की स्थिति में है। गोपीनाथ ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के सालाना सम्मेलन से इतर हमारे सहयोगी चैनल CNBC TV-18 साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत में ये बातें कहीं।

'महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी'

यह पूछे जाने पर पूरी दुनिया के सामने इस समय क्या आर्थिक चुनौतियां हैं? गीता गोपीनाथ ने कहा, "दुनिया के सामने इस समय कई आर्थिक चुनौतियां हैं। वर्ल्ड इकोनॉमी, महामारी के साये से उबर रही है, लेकिन अभी यह खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच हमारे सामने रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ा संकट आ गया है, जिसके चलते हमें कमोडिटी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दुनिया के कई इलाकों में लोगों के रहने-खाने-पीने की लागत बढ़ रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "इस सबके चलते दुनिया के कई सेंट्रल बैंकों ने महंगाई को काबू करने के प्रयास के तौर पर मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती करनी शुरू कर दी है। महंगाई पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इसके अलावा चीन की आर्थिक ग्रोथ धीमी हो रही है। IMF ने हाल ही में चीन और रूस के आर्थिक ग्रोथ अनुमान को घटाया है और इससे पूरी दुनिया की आर्थिक ग्रोथ धीमी हो सकती है।" उन्होंने कहा कि मंहगाई को रोकने के लिए सेंट्रल बैंकों को ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।


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शेयर बाजारों में अभी आएगी और गिरावट

महंगाई पर बोलते हुए गोपीनाथन ने कहा, "अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में महंगाई कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और इसे व्यापक तौर पर महसूस किया जा रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्क बैंक को इसके चलते तेजी से अपने रुख को कड़ा करना पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा। हालांकि मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती का विकसित देशों से अधिक इमर्जिंग मार्केट में असर देखने को मिलेगा और वहां व्यापार भी प्रभावित हो सकते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "यही कारण है कि हमें शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। कई इमर्जिंग देशों में शेयर बाजार 15 फीसदी तक गिर चुके हैं। आगे भी हमें शेयर बाजार और क्रिप्टो मार्केट में अधिक अस्थिरता देखने को मिलेगी।" गोपीनाथन ने कहा कि अगर सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में जरूरत से ज्यादा बढ़ोतरी करते हैं तो इसका एक बड़ा खतरा यह है कि इससे बॉरोइंग लागत काफी बढ़ जाएगी।

भारत अस्थिरता से निपटने में बेहतर स्थिति में

गीता गोपीनाथन ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते हमें इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकलते हुए देखने को मिलेगा, जैसा कि अभी चीन और भारत में हो रहा है। इस बदली स्थिति में कौन सा देश किस तरह की रणीनित अपनता है, यह उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पर निर्भर करेगा। अगर भारत को लेकर बात करें तो भारत के पास करीब 600 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। ऐसे में यह किसी भी अस्थिरता या उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभालने की स्थिति में है। लेकिन कुछ देश भारी कर्ज के दबाव में है और दिवालिया होने के कगार पर है। कुछ मामलों में, इन देशों से विदेशी पैसा निकलने पर इन्हें डेट रिस्ट्रक्चरिंग की जरूरत हो सकती है।"

वैश्विक मंदी का खतरा कम, लेकिन फूड इंफ्लेशन बढ़ेगा

"खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी महंगाई आने वाले दिनों में अभी और बढ़ने वाली है।" उन्होंने कहा, "वैश्विक मंदी का खतरा आज की तारीख में कम है। कुछ देशों में जरूर तकनीकी मंदी देखने को मिल सकती है। खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी महंगाई अभी बढ़ेगी। आप देख सकते हैं IMF ने चीन के आर्थिक ग्रोथ अनुमान को घटाया है। सेंट्रल बैंकों को आपस में संवाद करने और एक स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है।"

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