भारत की 1991 की उदारीकरण नीति को एक बड़ा कदम माना जाता है, जिसने देश की असली क्षमता को अनलॉक किया। लेकिन दिग्गज निवेशक और GQuant Investech के फाउंडर शंकर शर्मा का मानना है कि इसके बाद का दौर भारत में विदेशी तकनीक और पूंजी पर निर्भरता बढ़ाने वाला साबित हुआ। इससे भारतीय कंपनियों को दूसरे देशों में दबदबा बढ़ाने में कोई मदद नहीं मिली।
