वैश्विक विमानन उद्योग भारी दबाव से गुजर रहा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग ने कोविड-19 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी बाधा पैदा कर दी है। इससे एयरलाइंस की 50 अरब डॉलर से ज्यादा की वैल्यू खत्म हो गई है और एक लंबे वक्त तक चलने वाले संकट का डर बढ़ गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से 20 सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से लिस्टेड एयरलाइंस के मार्केट वेल्यूएशन में से लगभग 53 अरब डॉलर साफ हो गए हैं। यह बढ़ती लागत, ऑपरेशंस में बाधाओं और कमजोर होती मांग को लेकर निवेशकों की गहरी चिंताओं को उजागर करता है।
कई एयरलाइनों को हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों और सुरक्षा जोखिमों के कारण मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में अपने कमर्शियल ऑपरेशंस को या तो रोकना पड़ा है या कम करना पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र, जो दुनिया के कुछ सबसे व्यस्त ट्रांजिट हब का घर है, विशेष रूप से प्रभावित हुआ है।
जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल
जैसे-जैसे संघर्ष अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर रहा है, एयरलाइंस अपनी उड़ानों का मार्ग बदल रही हैं, उड़ानों की संख्या कम कर रही हैं, या सेवाओं को पूरी तरह से सस्पेंड कर रही हैं। यह बाधा केवल इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाले लंबी दूरी के रूट भी प्रभावित हुए हैं। इससे यात्रा का समय और लागत बढ़ गई है। उद्योग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति अतीत के उन भू-राजनीतिक झटकों के जैसी है, जिन्होंने वैश्विक विमानन नेटवर्क को बाधित किया था। जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल है। ईंधन, एयरलाइंस के ऑपरेशनल खर्च का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होता है। 28 फरवरी को संघर्ष भड़कने के बाद से ईंधन की कीमत दोगुनी हो गई है, जिससे एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी दबाव पड़ रहा है। कुछ बाजारों में जेट फ्यूल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
कुछ एयरलाइंस की ओर से ईंधन खरीद की हेजिंग (कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव) की गई है। इसके बावजूद कीमतों में तेज वृद्धि ने अतिरिक्त लागत को वहन करने के लिए बहुत कम गुंजाइश छोड़ी है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे एयरलाइंस अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को बचाने की कोशिश करेंगी, दुनिया भर में हवाई टिकटों की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
ईंधन की किल्लत होने का भी डर
एयरलाइंस ईंधन की किल्लत हो सकने की आशंका को लेकर भी लगातार चिंतित हैं। वैश्विक तौर पर कच्चे तेल की सप्लाई में बाधाओं से अधिकारियों ने आपातकालीन योजना बनाना शुरू कर दिया है। Air France-KLM जरूरत पड़ने पर एशिया जैसे कुछ इलाकों में अपनी सेवाओं में कटौती कर सकती है। AFP के मुताबिक, United Airlines अपने फ्लाइट शेड्यूल में पहले ही कटौती कर चुकी है।
एविएशन सेक्टर की मुश्किलें बड़े पैमाने पर ऊर्जा संकट से जुड़ी हैं। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद हो जाने ने कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को बुरी तरह से सीमित कर दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ गई हैं। हवाई मार्ग से माल ढुलाई भी मिडिल ईस्ट के संकट से प्रभावित हो रही है। पानी के रास्ते शिपिंग बाधित होने से ज्यादा माल हवाई मार्ग से जा रहा है। इससे मुख्य हवाई अड्डों पर क्षमता की कमी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें पैदा हो रही हैं।
हवाई टिकट की बढ़ती कीमतों से मांग घटने का खतरा
एविएशन सेक्टर में यह संकट ऐसे समय में आया है, जब एयरलाइंस कोविड19 महामारी से उबरकर मजबूत वापसी कर रही थीं। कई एयरलाइंस ने हाल की तिमाहियों में रिकॉर्ड मुनाफा देखा। लेकिन अब हवाई टिकट की बढ़ती कीमतें मांग के कम होने का खतरा पैदा कर रही हैं। अगर संकट जारी रहता है तो भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, ईंधन की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई के दबाव को और बढ़ा रही हैं। एविएशन सेक्टर का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करता है कि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कितने समय तक चलता है।