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पेट्रोल-डीजल हो सकता है और महंगा, BPCL के डायरेक्टर HR ने जताया अंदेशा; लेकिन क्यों?

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। जंग 28 फरवरी 2026 से जारी है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल और गैस की आवाजाही लगभग बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड May 24, 2026 पर 3:37 PM
पेट्रोल-डीजल हो सकता है और महंगा, BPCL के डायरेक्टर HR ने जताया अंदेशा; लेकिन क्यों?
अगर लंबे समय तक मौजूदा हालात बने रहे तो ईंधन की खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी होना तय है।

अगर मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहा, तो खुदरा ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी को शायद टाला न जा सके। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बात भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के डायरेक्टर (ह्यूमन रिसोर्सेज) राज कुमार दुबे ने कही है। कच्चे तेल में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसे देखते हुए दुबे ने नीति निर्माताओं के सामने 3 विकल्प रखे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है, "अब, 2 या 3 विकल्प खुले हैं। एक है- कीमतों में बढ़ोतरी, जो पेट्रोल पंपों पर साफ दिखाई दे। दूसरा है- पेट्रोलियम कंपनियां नुकसान खुद उठाएं और घाटा बढ़ाती रहें। तीसरा विकल्प है- सरकार डेफिसिट फाइनेंसिंग के जरिए फंड की व्यवस्था करे।" डेफिसिट फाइनेंसिंग मतलब सरकार बढ़ते खर्च या नुकसान को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पैसा जुटाए। दुबे ने बताया कि वैश्विक कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को शुरू में अस्थायी माना गया था, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, लगता है कि यह सिलसिला जारी रहेगा।

पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी। उसके बाद ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया। व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई। इससे कच्चे तेल और गैस का ट्रांसपोर्टेशन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नतीजतन कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही है। आमतौर पर पूरी दुनिया को सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का 5वां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुंचता है।

हालात नहीं सुधरे तो बढ़ोतरी होना तय

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