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चीन ने वापस लौटाया भारत का चावल, चीन GMO विवाद गहराया, TREACG ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की

भारतीय निर्यातक सभी नियमों का पालन करते हैं । मान्यता प्राप्त लैब से जांच के बाद ही चावल भेजते हैं। छत्तीसगढ़ "धान के कटोरे" के रूप में वैश्विक निर्यात में बड़ी भूमिका है। निर्यातकों के विश्वास के लिए उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप जरूरी है

Sujata Yadavअपडेटेड Apr 28, 2026 पर 2:01 PM
चीन ने वापस लौटाया भारत का चावल, चीन GMO विवाद गहराया, TREACG ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 23 अप्रैल 2026 को को स्टेटमेंट जारी किया। स्टेटमेंट के अनुसार भारत में व्यावसायिक खेती के लिए GMO चावल को मंजूरी नहीं है

चीन में भारतीय चावल के शिपमेंट में GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) पाए जाने के खबरें सामने आई है। जिसके कारण कई खेपों को चीनी बंदरगाहों पर रोका गया है या अस्वीकार किया गया। इससे भारतीय निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (TREACG) ने ने मामले पर गंभीर चिंता जाहिर की है।

भारत का पक्ष: सिर्फ NON-GMO चावल

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 23 अप्रैल 2026 को को स्टेटमेंट जारी किया। स्टेटमेंट के अनुसार भारत में व्यावसायिक खेती के लिए GMO चावल को मंजूरी नहीं है। ICAR के अंतर्गत किसी भी चावल कार्यक्रम में GMO पर कोई शोध कार्य नहीं किया जा रहा है। भारत से निर्यात होने वाला सभी चावल वैरायटी पूरी तरह से NON GMO है।

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