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Commodity Roundup: तिलहन की बुआई में गिरावट, जुलाई-अगस्त में महंगा होगा खाने का तेल?

Commodity Roundup: खरीफ सीजन में तिलहन की बुआई में गिरावट आई। कमजोर और देरी से आए मानसून के कारण तिलहन का कुल रकबा पिछले साल के 109.27 लाख हेक्टेयर से तेजी से गिरकर 66.31 लाख हेक्टेयर पर आ गया

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Jul 07, 2026 पर 3:14 PM
Commodity Roundup: तिलहन की बुआई में गिरावट, जुलाई-अगस्त में महंगा होगा खाने का तेल?
बीते कुछ दिनों से अच्छी बारिश हुई है। बारिश होने से किसान सोयाबीन की बुआई बढ़ाएंगे। जून में मॉनसून काफी कमजोर था, जुलाई में अच्छी बारिश हुई।

Commodity Roundup: खरीफ सीजन में तिलहन की बुआई में गिरावट आई। कमजोर और देरी से आए मानसून के कारण तिलहन का कुल रकबा पिछले साल के 109.27 लाख हेक्टेयर से तेजी से गिरकर 66.31 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें भी सबसे ज्यादा असर सोयाबीन और मूंगफली की खेती पर पड़ा है। 5 जुलाई तक तिलहन की बुआई 17% घटी। जबकि सोयाबीन की बुआई 11 फीसदी घटी है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी प्रगति और प्रमुख उत्पादक राज्यों में सामान्य से कम वर्षा के कारण किसानों को समय पर बुवाई का अवसर नहीं मिल पाया, जिससे तिलहन फसलों का रकबा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

सोयाबीन की बुवाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है। 5 जुलाई तक देश में केवल 47.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 79.20 लाख हेक्टेयर थी। यह 5 वर्षीय औसत 128.71 लाख हेक्टेयर से भी काफी कम है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण किसान बुवाई का इंतजार कर रहे हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र के कई हिस्सों और कर्नाटक में सोयाबीन की बुवाई की उपयुक्त अवधि अब लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे अंतिम रकबे और उत्पादन में कमी की आशंका बढ़ गई है।

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