'खेत बन जाएंगे पेट्रोल पैदा करने वाले कुएं', इस कारण अमित शाह ने कहा ऐसा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक पोर्टल की लॉन्चिंग के मौके पर कहा कि जल्द ही खेत पेट्रोल पैदा करने वाला कुआं बन जाएगा। जो पोर्टल आज लॉन्च हआ है, वह तुअर दाल उगाने वाले किसानों के रजिस्ट्रेशन, खरीदारी और पेमेंट से जुड़ा हुआ है। जानिए इस पोर्टल को क्यों लॉन्च किया गया है और केंद्रीय मंत्री ने खेतों के तेल कुएं बनने की जो बात कही है, उसका मतलब क्या है

अपडेटेड Jan 04, 2024 पर 4:46 PM
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2025-26 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए लाखों टन एथेनॉल का उत्पादन करने की जरूरत है। इसमें मदद करने के लिए, NAFED और NCCF जल्द ही मक्के के लिए एक पोर्टल लॉन्च करेंगे।

सरकार जल्द ही ऐसा पोर्टल लॉन्च करने वाली है जो मक्का किसानों को एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्री से जोड़ देगा। ये बातें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक पोर्टल की लॉन्चिंग के मौके पर कही। जो पोर्टल लॉन्च हआ है, वह तुअर दाल उगाने वाले किसानों के रजिस्ट्रेशन, खरीदारी और पेमेंट से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि जल्द ही ऐसा ही एक पोर्टल मक्का के लिए नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडेरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडेरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) लॉन्च करेगी जिससे एथेनॉल प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

'खेत बन जाएंगे पेट्रोल पैदा करने वाला कुआं'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2025-26 तक पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए लाखों टन एथेनॉल का उत्पादन करने की जरूरत है। इसमें मदद करने के लिए, NAFED और NCCF जल्द ही मक्के के लिए एक पोर्टल लॉन्च करेंगे जिस पर रजिस्ट्रेशन, खरीदारी और पेमेंट से जुड़ा काम होगा। जो किसान मक्का उगाते हैं, वे इस पोर्टल के जरिए सीधे एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रीज से जुड़ जाएंगे। ये फैक्ट्रीज इसे न्यूनतम समर्थन भाव (MSP) पर खरीदेंगे। उन्होंने आगे कहा कि इसे ऐसे समझ सकते हैं कि खेत मक्का नहीं उगाएंगे बल्कि पेट्रोल पैदा करने वाले कुएं बन जाएंगे।


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आज जो पोर्टल लॉन्च हुआ, उससे क्या होगा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज एक पोर्टल लॉन्च किया है। इसका लक्ष्य बेहतर भाव और सीधे किसानों के खाते में पैसे भेजने के तरीकों से देश में तुअर दाल का उत्पादन बढ़ाने का है। जिन किसानों को इस पोर्टल का इस्तेमाल करना है, उन्हें पहले इस पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ही वे MSP या बाजार भाव, जो भी अधिक हो, उस पर अपनी तुअर दाल को बेच सकेंगे। सरकार के मुताबिक इस पोर्टल के जरिए बफर स्टॉक का 80 फीसदी सीधे किसानों से खरीदा जा सकेगा और इससे आयात पर निर्भरता कम होगी।

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2027 तक दालों को लेकर आत्मनिर्भर होने का है लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने इस मौके पर कहा कि मूंग और चना दाल के मामले में देश आत्मनिर्भर है लेकिन बाकी दालें अभी भी आयात करनी होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे देश में जहां पानी की उपलब्धता बढ़ रही है, वहां दालों का आयात बेहतर नहीं कहा जा सकता है। इसीलिए पीएम मोदी की कोशिश है कि भारत 2027 तक दालों के मामले में आत्मनिर्भर हो जाए। बता दें कि घरेलू उत्पादन में कमी के कारण भारत में दालों खासतौर से तुअर दाल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। नवंबर में खुदरा बाजार में दालों की मुद्रास्फीति यानी इसके भाव बढ़ने की दर 20.2 फीसदी थी और यह लगातार छठे महीने दोहरे अंक में रही।

दालों की बढ़ती कीमत ने सरकार को कई कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। इसे लेकर सरकार ने जमाखोरी को रोकने के लिए अरहर और उड़द दाल पर स्टॉक सीमा लगाया और जुलाई 2023 में 'भारत' ब्रांड के तहत सब्सिडी वाली दाल भी बेचनी शुरू की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 'भारत दाल' केवल सात महीनों में ब्रांडेड दालों के मामलों में सबसे अधिक बिकने वाला ब्रांड बन गया है।

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