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Commodity Market: मक्के पर कंट्रोल ऑर्डर लाने की मांग हुई तेज, क्या सरकार पूरी करेगी किसानों की मांग, क्या कहते है बाजार जानकार

Maize Control Order: किसान सरकार से मक्के पर कंट्रोल ऑर्डर लाने की मांग कर रहे हैं। ताकि इथेनॉल डिस्टिलरीज को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मक्का खरीदने के लिए मजबूर किया जा सके। दलील दी जा रही है कि इससे कंपनियां उनसे एथेनॉल बनाने के लिए खरीद करने के लिए बाध्य हो जाएंगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 17, 2025 पर 12:56 PM
Commodity Market: मक्के पर कंट्रोल ऑर्डर लाने की मांग हुई तेज, क्या सरकार पूरी करेगी किसानों की मांग, क्या कहते है बाजार जानकार
किसानों ने कहा कि 2014 में सरकार ने दावा किया था कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से किसान “ऊर्जा उत्पादक” बनेंगे और उनकी आय दोगुनी होगी। लेकिन 10 साल बाद भी किसानों को मक्का पर MSP नहीं मिल पा रहा है।

Maize Control Order:  किसान सरकार से मक्के पर कंट्रोल ऑर्डर लाने की मांग कर रहे हैं। ताकि इथेनॉल डिस्टिलरीज को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मक्का खरीदने के लिए मजबूर किया जा सके। दलील दी जा रही है कि इससे कंपनियां उनसे एथेनॉल बनाने के लिए खरीद करने के लिए बाध्य हो जाएंगी।

मक्का किसानों और रूपांतरण उद्योगों (डिस्टिलरी) के साथ किए जा रहे व्यवहार में सरकारी नीति में पक्षपात का आरोप लगाते हुए किसानों का कहना है कि जब सरकार तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के माध्यम से गारंटीकृत मूल्य पर उपज (इथेनॉल) खरीद रही है, तो उसे कच्चे माल की कीमत भी निर्धारित करनी चाहिए।

किसानों का कहना है कि OMCs के जरिए डिस्टिलरी से 71.86 रुपये/लीटर पर एथेनॉल खरीद रही है। जबकि मंडियों में उपलब्ध औसत मक्का भाव (1821 रुपये/क्विंटल) के आधार पर एथेनॉल का मूल्य 54 रुपये/लीटर होना चाहिए। किसानों ने आरोप लगाया कि लाभ किसानों को देने का वादा तो किया गया, लेकिन फायदा डिस्टिलरी को मिला और किसान MSP से बहुत नीचे मक्का बेचने को मजबूर हैं।

किसानों ने कहा कि 2014 में सरकार ने दावा किया था कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से किसान “ऊर्जा उत्पादक” बनेंगे और उनकी आय दोगुनी होगी। लेकिन 10 साल बाद भी किसानों को मक्का पर MSP नहीं मिल पा रहा है। जबकि एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 के बजाय 2025 में ही हासिल कर लिया गया।

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