कुछ एसेट ऐसे होते हैं जिनकी वैल्यू समय के साथ कम नहीं होती है। सोना (Gold) इसका उदाहरण है। सदियों से सोने को इनवेस्टमेंट के लिहाज से सबसे सुरक्षित माना जाता रहा है। इसकी वजह है कि किसी देश की करेंसी की तरह समय के साथ इसकी वैल्यू कम नहीं होती है। इस पर किसी करेंसी की तरह मुद्रास्फीति (Inflation) का असर नहीं पड़ता है।
किसी देश की करेंसी को कई तरह के खतरे होते हैं। इनफ्लेशन में इनमें सबसे बड़ा है। करेंसी पर दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में होने वाली घटनाओं का भी असर पड़ता है। बहुत ज्यादा इनफ्लेशन के चलते कई देशों की करेंसी की वैल्यू में बड़ी गिरावट आ चुकी है। जिमबाब्वे और वेनेजुएला इसके उदाहरण हैं।
इनफ्लेशन के असर से बचने के लिए लोग शेयर, बॉन्ड्स, रियल एस्टेट जैसे ऐसेट्स में इनवेस्ट करते हैं। इसकी वजह यह है कि आम तौर पर समय के साथ इनकी वैल्यू बढ़ती रहती है। हालांकि, इन एसेट्स में भी कई बार बड़ी गिरावट देखने को मिलती है। इसका मतलब है कि ज्यादातर एसेट्स पर किसी न किसी तरह का रिस्क होता है।
इस लिहाज से गोल्ड इकलौता ऐसा एसेट है, जिस पर लोगों ने सबसे ज्यादा भरोसा किया है। अनिश्चित समय में इसने लोगों को अपनी वैल्थ को बचाए रखने का माध्यम दिया है। इसकी कई खासियतें हैं। यह समय के साथ खराब नहीं होता। इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है। इसे आसानी से दूसरे एसेट में कनवर्ट किया जा सकता है।
चूंकि गोल्ड की सप्लाई सीमित है। इसलिए इक्विटी और रियल एस्टेट जैसे दूसरे एसेट क्लास में होने वाले उतार-चढ़ाव का इस पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है। यही वजह है कि न सिर्फ आम लोग बल्कि दुनियाभर की सरकारें और केंद्रीय बैंक भी गोल्ड में इनवेस्ट करते हैं।
ऑयल को भी ऐसे माध्यम के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी वैल्यू नहीं घटने वाली है। दुनिया में यह सीमित मात्रा में उपलब्ध है। इस वजह से इसकी कीमतें लगातार बढ़ती रहती है। यूक्रेन क्राइसिस शुरू होने के बाद से ऑयल में तेज उछाल देखने को मिला है।
डिजिटल युग में एक नया एसेट सामने आया है, जिस पर लोग भरोसा कर रहे है। वह है बिटकॉइन (Bitcoin) और दूसरी क्रिप्टोकरेंसीज (Cryptocurrencies)। रूस और यूक्रेन के लोग बिटकाइन और दूसरे क्रिप्टो खरीद रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनके देश की करेंसी की वैल्यू घट सकती है, लेकिन बिटकॉइन की वैल्यू नहीं घटने वाली।
गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में सुरक्षित एसेट के रूप में सोने की बाजार हिस्सेदारी का काफी हिस्सा बिटकॉइन हथिया सकता है। इसकी वजह यह है कि बिटकॉइन की मान्यता दुनियाभर में बढ़ रही है। अभी बिटकॉइन का मार्केट कैपिटलाइजेशन 700 अरब डॉलर है। इसके मुकाबले सोने में कुल इनवेस्टमेंट की वैल्यू 2.6 लाख करोड़ डॉलर है।
यूक्रेन क्राइसिस की वजह से स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट के बावजूद बिटकॉइन में पिछले महीने 25 फीसदी तेजी आई है। हालांकि, गोल्ड और ऑयल की तरह बिटकॉइन का व्यवहारिक इस्तेमाल नहीं है, फिर भी लोग इसमें इनवेस्ट करना पसंद कर रहे हैं। बिटकॉइन की कुल सप्लाई 2.1 करोड़ से ज्यादा नहीं हो सकती।