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Dry fruit prices: सप्लाई में आ रही रुकावट पड़ेगी जेब पर भारी, दिवाली से पहले 30% बढ़ सकती हैं ड्राई फ्रूट की कीमत

Dry fruit prices: मजबूत US डॉलर दबाव की एक और परत बढ़ा रहा है। पबरेजा ने चेतावनी दी कि अगर रुपया और कमज़ोर होता है, तो ड्राई फ्रूट की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं क्योंकि ज़्यादातर इंपोर्ट डॉलर में होते हैं।

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Jun 02, 2026 पर 5:05 PM
Dry fruit prices: सप्लाई में आ रही रुकावट पड़ेगी जेब पर भारी, दिवाली से पहले 30% बढ़ सकती हैं ड्राई फ्रूट की कीमत
भारत का ड्राई फ्रूट मार्केट पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ रहा है, जिसकी सालाना डिमांड लगभग 10–12% बढ़ रही है।

Dry fruit prices: ड्राई फ्रूट बाजार पर पश्चिम एशिया संकट की मार साफ पड़ती नजर आ रही है। पश्चिम एशिया संकट से ड्राई फ्रूट कारोबार पर दबाव दिखा है। ईरान, इराक और अफगानिस्तान से सप्लाई 30-40% घटी है। बॉर्डर बंद होने और कार्गो मूवमेंट प्रभावित होने से सप्लाई में कमी आई है। वहीं प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स की आवक में बड़ी कमी देखने को मिली। यहीं वजह है कि भारत में ड्राई फ्रूड के थोक और रिटेल कीमतों में उछाल देखने को मिला है।

ड्राई फ्रूट की कीमतें आगे कैसे रहेगी इस पर बात करते हुए कमोडिटी ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के MD राजीव पबरेजा ने कहा कि इस साल 2026 में दिवाली से पहले भारत में ड्राई फ्रूट की कीमतें 20-30% बढ़ सकती हैं। क्योंकि वेस्ट एशिया में लड़ाई की वजह से ईरान और अफगानिस्तान जैसे खास एक्सपोर्ट करने वाले देशों से सप्लाई में रुकावट आ रही है। पबरेजा ने कहा कि बढ़ती माल ढुलाई की लागत, शिपमेंट में देरी और मजबूत डॉलर की वजह से बादाम, पिस्ता और खजूर की इम्पोर्ट लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे त्योहारों के मौसम से पहले व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए चिंता बढ़ गई है। पबरेजा ने कहा, "भारत में इम्पोर्ट में 20 से 25% की कमी आएगी," और भारत अभी भी इम्पोर्ट किए जाने वाले ड्राई फ्रूट और नट्स पर बहुत ज़्यादा निर्भर है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक लॉजिस्टिक्स है। उनके मुताबिक, पोर्ट बंद होने और लड़ाई से जुड़ी रुकावटों की वजह से ईरान से माल ढुलाई की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, “हम ईरान से कुछ भी खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत पहले लगभग $500 थी। आज हम उसी माल ढुलाई के लिए लगभग $15,000 दे रहे हैं।” वहीं ट्रांजिट टाइम भी तेजी से बढ़ गया है। ईरान से शिपमेंट में पहले 7 से 8 दिन लगते थे, अब इसमें 45-60 दिन लग रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन और इंपोर्टर्स के लिए वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ रहा है।

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