अरहर दाल की कीमतों में लगी आग, सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं घट रही हैं कीमतें

टमाटर, प्याज, मिर्च और अदरक के बाद अब दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ये कीमतें ऐसे समय में बढ़ी हैं जब पहले ही बुआई का रकबा घट गया है। मानसून में देरी, कहीं ज्यादा कहीं कम बारिश होने की वजह से अगले सीजन के लिए दाल की बुआई कम हुई है

अपडेटेड Jul 19, 2023 पर 3:12 PM
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9 जुलाई तक के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल के मुकाबले 25.8 फीसदी कम रकबे पर दाल की बुआई हुई है

Tur Price: सरकार एक तरफ महंगाई पर काबू पाने की तमाम कोशिशें कर रही है लेकिन दूसरी तरफ मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले से ही लाल हुए टमाटर और प्याज के बाद अब अरहर दाल आम लोगों को रुला रहा है। सरकार पिछले कुछ दिनों से अरहर या तुअर दाल के भाव पर लगाम लगाने में जुटी है लेकिन इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स डेटा के मुताबिक, 16 जुलाई तक अरहर दाल की कीमत पिछले एक साल के मुकाबले 32 फीसदी तक चढ़ चुकी है।

यहां तक कि पिछले एक हफ्ते में भी अरहर दाल काफी महंगी हो चुकी है। सिर्फ जून की बात करें तो इस दाल की कीमत 7 फीसदी तक बढ़ चुकी है।


एक महीना पहले अरहर दाल की कीमत 127.37 रुपए प्रति किलो थी जो 16 जुलाई को बढ़कर 136.29 रुपए किलो पहुंच गई। जबकि एक साल पहले अरहर दाल का भाव 103.03 रुपए किलो था।

हर दाल का बढ़ा भाव

अरहर दाल के साथ उड़द और मूंग दाल की कीमतें भी बढ़ चुकी हैं। पिछले एक साल में उड़द दाल जहां 10% महंगा हुआ है जबकि मूंग दाल की कीमतें 8.8% बढ़ चुकी है।

दालों की बुआई का रकबा हुआ कम 

दालों की कीमतें ऐसे समय में बढ़ी हैं जब पहले ही बुआई का रकबा घट गया है। मानसून में देरी, कहीं ज्यादा कहीं कम बारिश होने की वजह से अगले सीजन के लिए दाल की बुआई कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 9 जुलाई तक के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल के मुकाबले 25.8 फीसदी कम रकबे पर दाल की बुआई हुई है।

देश के कुल दाल उत्पादन में महाराष्ट्र और कर्नाटक की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन इस साल इन इलाकों में बारिश कम हुई है।

क्या सरकार की कोशिशें काफी हैं?

दालों की कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसके तहत सरकार ने 2023-24 की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत अरहर, उड़द और मसूर दाल के लिए 40 फीसदी की प्रोक्योरमेंट सीलिंग हटा दी है।

इस फैसले के बाद दालों की सरकारी खरीद बिना किसी सीलिंग के किसानों से मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) पर की जा सकती है।

कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक, सरकार उम्मीद कर रही है कि आने वाले खरीफ और रबी सीजन में किसान अरहर, उड़द और मसूर दाल का रकबा बढ़ाएंगे।

सरकार ने इसी साल 2 जून को तुअर और उड़द की जमाखोरी पर रोक लगा दी थी ताकि इसकी कीमतों पर काबू पाया जा सके।

इसके साथ ही सरकार ने अरहर दाल और उड़द दाल पर लगने वाले 10 फीसदी की सामान्य कस्टम ड्यूटी को भी FY2023-24 जीरो पर बरकरार रखा है। फूड इनफ्लेशन को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2021 में तुअर दाल के फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी थी जो अभी तक जारी है।

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