LPG Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद 22 मई को भारत के बड़े शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे महंगाई की मार झेल रहे लाखों परिवारों को राहत मिली है।
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा जारी ताजा दरों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम के घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹913, मुंबई में ₹912.50, कोलकाता में ₹939 और चेन्नई में ₹928.50 पर स्थिर है। इस महीने की शुरुआत में घोषित भारी बढ़ोतरी के बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें भी काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं।
घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखने का फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और एलपीजी बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इन तनावों की वजह से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के शिपिंग रूट को लेकर चिंता बढ़ने से पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में काफी बदलाव देखने को मिला है।
वैश्विक तनाव से ऊर्जा बाजार अस्थिर बने हुए हैं
इस महीने की शुरुआत में, तेल कंपनियों ने कई शहरों में 19 किलोग्राम के कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में लगभग 100 रुपये की बढ़ोतरी की, जिसका कारण अंतरराष्ट्रीय इनपुट लागत में बढ़ोतरी बताया गया। इस बढ़ोतरी से रेस्टोरेंट, होटल और छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए जो कमर्शियल गैस पर ज्यादा निर्भर हैं। हालांकि, घरेलू LPG उपभोक्ताओं को अब तक अतिरिक्त मूल्य वृद्धि से राहत मिली है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र सरकार महंगाई और बढ़ते सब्सिडी बोझ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां वैश्विक कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू एलपीजी बिक्री में होने वाले नुकसान का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही हैं।
रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय LPG कि कीमतों में उछाल और माल ढुलाई लागत में बढ़ोतरी के कारण मई में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को LPG की बिक्री में भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट से जुड़ी सप्लाई संबंधी चिंताओं ने दुनियाभर की ईंधन कंपनियों पर दबाव और बढ़ा दिया है।
हालांकि, उपभोक्ताओं ने फिलहाल गैस कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने पर राहत जताई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक ऊर्जा बाजार में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव बना रहा और अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहीं, तो इसका असर आगे चलकर भारत में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।
भारत में एलपीजी गैस की कीमतों में आमतौर पर हर महीने की शुरुआत में बदलाव किया जाता है। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, माल ढुलाई लागत और सरकार की सब्सिडी नीति के आधार पर तय होता है। घरेलू एलपीजी की कीमतें राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आम लोगों के घर के खर्च पर पड़ता है।
फिलहाल, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद भारत के लोगों को रसोई गैस की कीमतों में कोई बढ़ोतरी न होने से अस्थायी राहत मिल रही है।