Wheat Prices: गेहूं की कीमतों में कमी लाने के लिए सरकार अहम कदम उठा रही है। सरकार ने जब करीब 30 लाख टन अनाज को खुले बाजार में बिक्री का फैसला लिया तो इससे थोक और खुदरा बाजार में गेहूं की कीमतें प्रति किग्रा 5 रुपये तक कम हो गईं। इसकी जानकारी आज केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने दी। फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा का कहना है कि गेहूं और आटे की कीमतों पर सरकार निगाह बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सरकार और कदम उठाएगी। सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की बिक्री बढ़ा सकती है। हालांकि फूड सेक्रेटरी का यह भी कहना है कि सरकार गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध को हटाने पर विचार नहीं कर रही है। इस प्रतिबंध को पिछले साल मई में भंडारण में तेज गिरावट के चलते लगाया गया था।
गेहूं सस्ता करने के लिए क्या कदम उठा सकती है सरकार
फूड सेक्रेटरी के मुताबिक जनवरी में ओएमएसएस का एलान किया गया था जिसके बाद से गेहूं की कीमतें गिरी हैं। होलसेल मार्केट में इसकी कीमत अब 3000 रुपये से गिरकर 2500 रुपये प्रति कुंतल के नीचे आ गया है और अब आगे भी इसमें गिरावट के आसार हैं। इसके अलावा खुदरा कीमतें भी 3300-3400 रुपये से टूटकर 2800-2900 रुपये प्रति कुंतल पर आ गया है। हालांकि फूड सेक्रेटरी संजीव का कहना है कि सरकार स्थिति पर लगातार निगाह बनाए हुए है और अगर जरूरत पड़ी तो सरकार जरूरी कदम उठाएगी। सरकार ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री का कोटा बढ़ा सकती है जोकि अभी 30 लाख टन है। इसके अलावा सरकार गेहूं का रिजर्व प्राइस भी कम कर सकती है।
गेहूं उत्पादन का क्या है रुझान
गेहूं के कम उत्पादन और एफसीआई (FCI) में कम भंडारण के चलते पिछले साल मई में सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दिया था ताकि इसकी कीमतों को थामा जा सके। अब इस साल की बात करें तो 1 अप्रैल को 96 लाख टन गेहूं स्टॉक में आ सकता है जो 75 लाख टन के बफर नॉर्म की जरूरतों से थोड़ा ही ऊपर है। पिछले फसल सत्र 2021-22 (जुलाई-जून) में गेहूं का उत्पादन कुछ राज्यों में गर्म मौसम के चलते सालाना 10.96 करोड़ टन से गिरकर 10.77 करोड़ टन रह गया। वहीं इस सत्र 2022-23 की बात करें तो गेहूं की बुवाई कुछ अधिक एरिया में हुई है और मंगलवार को कृषि मंत्रालय ने गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.21 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।