IOC को पेट्रोल की बिक्री पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये का घाटा, जून तिमाही में हुआ कितना लॉस?

IOC को जून, 2022 में समाप्त तिमाही के दौरान कुल 1,992.53 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि बीते साल समान तिमाही के दौरान 5,941.37 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था

अपडेटेड Aug 01, 2022 पर 7:44 AM
Story continues below Advertisement
यह जनवरी-मार्च, 2020 की तिमाही के बाद आईओसी को पहली बार किसी तिमाही में नुकसान हुआ है। उस समय कंपनी को महंगे कच्चे तेल की इन्वेंट्री और प्रोसेसिंग के चलते नुकसान हुआ था

IOC Q1 Result : भारत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग और फ्यूल रिटेलिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) अप्रैल-जून, 2022 तिमाही में पेट्रोल की बिक्री पर प्रति लीटर 10 रुपये और डीजल पर 14 रुपये का नुकसान हुआ। इसके चलते कंपनी को दो साल में पहली बार किसी तिमाही में घाटा उठाना पड़ा।

IOC को जून, 2022 में समाप्त तिमाही के दौरान कुल 1,992.53 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि बीते साल समान तिमाही के दौरान 5,941.37 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था। वहीं पिछली तिमाही यानी जनवरी-मार्च, 22 तिमाही में 6,021.9 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था।

दो साल में पहली बार तिमाही घाटा


यह जनवरी-मार्च, 2020 की तिमाही के बाद कंपनी को पहली बार किसी तिमाही में  नुकसान हुआ है। उस समय कंपनी को महंगे कच्चे तेल की इन्वेंट्री और प्रोसेसिंग के चलते नुकसान हुआ था।

अगले एक साल में चीन, जापान सहित कई दशों में आ सकती है मंदी लेकिन भारत नहीं फंसेगा इस दलदल में

आईओसी का एबिटडा (ईबीआईटीडीए) 88 फीसदी घटकर 1,358.9 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, तिमाही के दौरान कंपनी का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) ऊंचे स्तर पर यानी 31.8 डॉलर प्रति बैरल रहा है।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती से भी हुआ नुकसान

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘कंपनी की आय में गिरावट की प्रमुख वजह पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री पर मार्जिन में भारी गिरावट है। कंपनी को पेट्रोल पर प्रति लीटर 10 रुपये और डीजल पर 14 रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा एक्साइज ड्यूटी में कटौती की वजह से कंपनी को भंडारण पर भी 1,500 से 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।”

Mutual Fund : बदले हालात में एमएफ स्कीम्स के फेवरेट बने ऑटो स्टॉक्स, जानिए टॉप 5 शेयर

कॉस्ट बढ़ी लेकिन नहीं बढ़ी कीमतें

रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम कंपनियां लागत के हिसाब से प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल कीमतों में संशोधन करती हैं। लेकिन IOC के साथ भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने लागत बढ़ने के बावजूद फ्यूल के दाम नहीं बढ़ाए हैं।

इस दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात औसतन 109 डॉलर प्रति बैरल रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में पेट्रोल पंप पर फ्यूल की कीमतें 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल के भाव के हिसाब से तय की गई हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।