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Jio Financial को NBFC से CIC में कन्वर्ट करने के लिए रिजर्व बैंक को सौंपा गया आवेदन

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने कंपनी को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) में कन्वर्ट करने के लिए रिजर्व बैंक में आवेदन दिया है। जियो ने रेगुलेटरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 22, 2023 पर 2:44 PM
Jio Financial को NBFC से CIC में कन्वर्ट करने के लिए रिजर्व बैंक को सौंपा गया आवेदन
CIC ऐसी कंपनियां होती हैं, जिनकी एसेट्स का निवेश मुख्य तौर पर उनकी ग्रुप कंपनियों में इक्विटी, प्रेफरेंस शेयरों या कन्वर्बिटल बॉन्ड या लोन के रूप में होता है।

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) ने कंपनी को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) में कन्वर्ट करने के लिए रिजर्व बैंक में आवेदन दिया है। जियो ने रेगुलेटरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि कन्वर्जन के लिए आवेदन का मकसद रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance industries) से डीमर्जर के बाद कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में रिजर्व बैंक (RBI) की शर्तों के मुताबिक बदलाव करना है।

रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, CIC ऐसी कंपनियां होती हैं, जिनकी एसेट्स का निवेश मुख्य तौर पर उनकी ग्रुप कंपनियों में इक्विटी, प्रेफरेंस शेयरों या कन्वर्बिटल बॉन्ड या लोन के रूप में होता है। ऐसी कंपनियां परोक्ष रूप से होल्डिंग कंपनी होती हैं, जिनका मकसद अपनी ग्रुप कंपनियों पर नियंत्रण बनाए रखना होता है। ऐसी कंपनियां कोई वित्तीय गतिविधि नहीं करती हैं।

इसे मुख्य तौर पर इसे एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की कैटगरी में रखा गया है, जो कुछ शर्तों के साथ शेयरों और सिक्योरिटीज की खरीद का बिजनेस करती है। इनमें से एक शर्त यह है कि इसकी कम से कम 90 पर्सेंट नेट एसेट ग्रुप कंपनियों में इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन में निवेश के तौर पर उपलब्ध हो। दूसरा, यह ग्रुप कंपनियों में शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन के तौर पर किए गए निवेश की ट्रेडिंग नहीं करता है।

इसके अलावा, यह ग्रुप कंपनियों को लोन देने, ग्रुप कंपनियों के एवज में गारंटी इश्यू करने और बैंक डिपॉजिट, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, सरकारी सिक्योरिटीज, बॉन्ड या डिबेंचर में निवेश के अलावा कोई भी अन्य वित्तीय गतिविधि को अंजाम नहीं देती है। बहरहाल, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने बॉन्ड जारी कर पैसे जुटाने संबंधी रिपोर्ट को भी खारिज किया है। एक मीडिया एजेंसी की खबर में कहा गया था कि जियो फाइनेंशियल बॉन्ड जारी कर 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है।

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