कोरोना का नया लक्षण 'हैप्पी हाइपोक्सिया', कहने को तो है हैप्पी लेकिन पहुंचा सकता है ICU

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना का एक ऐसा लक्षम है जिसमें न सांस फूलेगी, न थकान लगेगी.

अपडेटेड May 12, 2021 पर 3:17 PM

पूरी दुनिया कोरोना को कहर से जूझ रही है। भारत कोरोना की दूसरी लहर की मार से बेहाल नजर आ रहा है। कोरोना एक ऐसी रहस्यमय बीमारी बन गई है जिसके नए- नए लक्षण  सामने आ रहे हैं। कोरोना का एक नया लक्षण सामने आया है जिसे हैप्पी हाइपोक्सिया नाम दिया गया है।

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना का एक ऐसा लक्षम है जिसमें न सांस फूलेगी, न  थकान लगेगी। लेकिन कोरोना चोरी-छुपे अपना काम करता रहेगा। मरीज के शरीर में कम ऑक्सीजन की घंटी भी नहीं बजेगी।  लेकिन मरीज की 24 घंटों में ही सीधे ICU में एंट्री होगी।

क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया?

कोरोना का ये नया लक्षण युवाओं में दिख रहा है। इससे हाइपोक्सिया  या खून में कम ऑक्सीजन की समस्या हो जाती है। इसमें ऐसा कुछ होने का मरीज को पता ही नहीं चलता। सामान्य तौर पर ऑक्सीजन 95 फीसदी रहता है। फिर एकाएक ऑक्सीजन स्तर घटकर 80 फीसदी से नीचे चला जाता है। इसका किडनी, दिल और दिमाग पर घातक असर होता है।

हैप्पी हाइपोक्सिया क्यों ?

कोरोना होने पर सूजन आती है। फेफड़ों की नसे जाम होने लगती हैं। सेलुलर प्रोटीन रिएक्शन तेज हो जाती है। खून के थक्के बनने लगते हैं । फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और खून में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।
 
मरीज को पता क्यों नहीं?


युवाओं में ही ये लक्षण ज्यादा देखा गया है। युवाओं की इम्युनिटी अच्छी होती है। युवाओं की सहनशक्ति बेहतर होती है। इनको ऑक्सीजन की कमी का एहसास नहीं होता है। युवा हाइपोक्सिया को सहन कर जाते हैं।

हाइपोक्सिया के लक्षण?

होठों का रंग बदलता है, त्वचा लाल, बैंगनी रंग लेती है। बिना कारण लगातार पसीना आता है और ऑक्सीमीटर में कम लेवल दिखता है।

हैप्पी हाईपोक्सिया से बचाव

शरीर के बारे में जागरूक रहें। नए लक्षणों के बारे में अपडेट रहें। शरीर में बदलाव को अनदेखा न करें। ऑक्सीमीटर का प्रयोग करें। कोरोना के संक्रमण पर नजर डालें तो 85% लोगों में माइल्ड, 13% लोगों में मॉडरेट और 2% लोगों में गंभीर संक्रमण होता है।
 
कोरोना को जाने

कोरोना में आए दिन नए लक्षण आ रहे हैं। नए लक्षणों को जानना बेहद जरूरी है। अलग-अलग स्तर की भी पहचान जरूरी है। रैशेज, डायरिया, कंजेक्टिवाइटिस भी इसके लक्षण हैं। RT-PCR भी नए वेरियंट के सामने कमजोर नजर आ रहा है।

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