वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इनकम टैक्स नियमों में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी की। इसी के साथ पहले की तारीख से टैक्स लगाने वाला कानून यानी कि रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स (Retrospective tax) अब आधिकारिक रूप से निरस्त होता दिख रहा है। रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को करीब 9 साल पहले 2012 में लागू किया गया था, जिसके बाद से ही यह नियम लगातार विवादों में रहा है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, केयर्न एनर्जी और वोडाफोन जैसी जिन भी कंपनियों के खिलाफ रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स का मामला लंबित है, उन्हें इस खत्म करने के लिए भारत सरकार को वादा करना होगा कि वह इस टैक्स विवाद से भविष्य में होने वाली किसी भी नुकसान के लिए सरकार से मुआवजे की मांग नहीं करेंगी।
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कंपनियों को यह भी लिखित में आश्वासन देना होगा कि वे किसी भी फोरम में चल रही इससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही को वापस लेंगी और भविष्य में कोई नया दावा नहीं करेगी। नोटिफिकेशन में कंपनियों को अपने खिलाफ लंबित मामले को खत्म करने के लिए 30-60 दिनों का समय दिया गया है।
बता दें कि सरकार ने इस संबंध में मॉनसून सत्र के दौरान टैक्सेशन लॉज अमेंडमेंट बिल संसद से पास कराया था और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने इस संबंध में सभी स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लिया था। नोटिफिकेशन के मुताबिक, संबंधित कंपनियां इस टैक्स से जुड़े सभी जारी कानूनी कार्यवाहियों को वापस लेंगी और भविष्य में भी इसे लेकर भारत या विदेश में किसी कोर्ट या मध्यस्थ के पास नहीं जाएंगी।
इन शर्तों को पूरा करने के बाद सरकार इन कंपनियों की ओर से रेट्रोस्पेक्टिक टैक्स के रूप में चुकाई गई राशि को वापस कर देगी। सरकार के इस कदम से केयर्न एनर्जी और वोडाफोन को फायदा होने की उम्मीद है। रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स की वजह से दोनों कंपनियों के साथ भारत सरकार की कानूनी लड़ाई चल रही है। दोनों ही कंपनियां इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जीत हासिल कर चुकी हैं।