वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में गुरुवार को एक बिल पेश किया जिससे रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स को लेकर केयर्न एनर्जी, वोडाफोन ग्रुप और 15 अन्य कंपनियों के साथ बड़े विवादों को निपटाने में मदद मिल सकती है। रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स पिछली तारीख से किसी कंपनी पर टैक्स लगाने को कहा जाता है।
टैक्सेशन लॉज (अमेंडमेंट) बिल का उद्देश्य 2012 में टैक्स चोरी के खिलाफ लागू किए गए कानून में एक संशोधन के पिछली तारीख से इस्तेमाल के कारण टैक्स डिमांड को रद्द करना है।
इस संशोधन का लक्ष्य भारतीय एसेट्स से जुड़ी विदेशी ट्रांजैक्शंस पर देश में टैक्स वसूलना था। इनमें कानून में बदलाव से पहले हुई ट्रांजैक्शंस भी शामिल थी।
नए बिल के तहत, केंद्र में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस की पूर्व सरकार के दौरान इनकम टैक्स एक्ट में मई 2012 में किए गए संशोधन से पहले हुई विदेशी ट्रांजैक्शंस पर टैक्स क्लेम को रद्द किया जाएगा। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें जुड़ी होंगी। मई 2012 के बाद भारतीय एसेट्स से जुड़ी विदेशी ट्रांजैक्शंस पर टैक्स देनदारी जारी रहेगी।
आब्रिट्रेशन के एक मामले में हार के बाद सरकार को केयर्न एनर्जी को 1.7 अरब डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया गया था। कंपनी ने फ्रांस में पेरिस के एक कोर्ट से भारतीय एसेट्स को जब्त करने का ऑर्डर भी हासिल किया था।
वोडाफोन ग्रुप ने भी इसी तरह का एक मामला जीता है। इसमें सरकार ने 3 अरब डॉलर से अधिक की टैक्स डिमांड की थी।
केयर्न एनर्जी ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से मना किया है। कंपनी ने कहा कि उसे संसद में यह बिल पेश किए जाने का पता चला है। कंपनी स्थिति की निगरानी कर रही है।
वोडाफोन ग्रुप ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। अन्य टैक्स विवादों में वेदांता रिसोर्सेज का सेसा गोवा में बड़ी हिस्सेदारी खरीदना और सनोफी का शांता बायोटेक का एक्विजिशन करना शामिल हैं।
सीतारमण ने कहा कि 2012 में किया गया संशोधन टैक्स को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया था। इससे निवेश के एक आकर्षक स्थान के तौर पर देश की साख को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सरकार की ओर से निवेश को लेकर एक सकारात्मक माहौल बनाया गया है।
जानकारों का कहना है कि हाल के महीनों में विदेशी आब्रिट्रेशन ट्राइब्यूनल्स के कुछ मामलों में हार का सामना करने के बाद भी सरकार को इस तरह का कदम उठाने की जरूरत थी।