सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जम्मू और कश्मीर में इस साल ग्रेनेड और IED हमलों और पिछले साल की तुलना में लक्षित हत्याओं में काफी तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। पिछले दो दिनों में ही, आतंकवादियों द्वारा लक्षित हमलों में पांच नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। News18 द्वारा एक्सेस किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2020 तक सुरक्षा बलों और नागरिकों पर आतंकवादियों ने 34 ग्रेनेड हमले किए। इस साल इसी अवधि के लिए ये आंकड़ा बढ़कर 44 हो गया।
इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IED) का इस्तेमाल करके किए गए हमलों में भी 600% की भारी बढ़ोतरी हुई। पिछले साल घाटी में इस तरह के केवल एक हमले की जानकारी मिली थी, जबकि इस साल सितंबर तक ऐसे सात हमले हुए हैं। सुरक्षा बलों ने इस साल भी 40 IED को सफलतापूर्वक डिफ्यूज किया है, जो पिछले साल की तुलना में नौ ज्यादा है।
हालांकि, आतंकवादियों द्वारा अपहरण की संख्या 2020 में नौ से काफी कम होकर इस साल अब तक एक हो गई है। सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चिंता लक्षित हत्याएं हैं, जहां अब आम नागरिकों को आतंकवादी मार रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे 34 हमले हुए हैं, जबकि पिछले साल 31 हमले हुए थे।
पिछले दो दिनों में जहां पांच नागरिक मारे गए, वहीं पिछले पांच दिनों में मरने वालों की संख्या सात हो गई है। सात में से चार अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदाय से थे। इनमें से छह मौतें श्रीनगर से हुई हैं।
श्रीनगर के ईदगाह स्थित गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और दीपक चंद की गुरुवार सुबह करीब 11:15 बजे स्कूल परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
शनिवार को आतंकियों ने श्रीनगर में माजिद अहमद गोजरी और बटमालू में मोहम्मद शफी डार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एक दूसरी घटना में गुरुवार रात श्रीनगर के बरारीपोरा में CRPF की 161 बटालियन की प्लाटून चौकी को निशाना बनाकर अज्ञात आतंकवादियों ने ग्रेनेड दागे। ग्रेनेड चारदीवारी के बाहर फटा और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
सरकारी आंकड़ों में पिछले साल की तरह ही इस साल सितंबर तक सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा की 71 घटनाएं सामने आई हैं। डेटा ने जम्मू-कश्मीर में रिपोर्ट की गईं मुठभेड़ की संख्या में गिरावट दिखाई। पिछले साल 92 एनकाउंटर हुए और इस साल सितंबर तक 59।