'सरकार ने नहीं उच्च आदेशों से केदारनाथ यात्रा पर लगी रोक,' पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत ने दिया ये सुझाव

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, हमने चरणबद्ध तरीके से यात्रा की अनुमति दी थी
अपडेटेड Aug 04, 2021 पर 07:36  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) पर लगी रोक को लेकर उत्तराखंड (Uttarakhand) के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) ने कहा कि केदारनाथ यात्रा को सरकार के नहीं बल्कि उच्च आदेशों से रोका गया है।


अपने कार्यकाल में यात्रा की अनुमति के तरीके को बताते हुए रावत ने कहा, "जब मैं मुख्यमंत्री था, हमने चरणबद्ध तरीके से यात्रा की अनुमति दी थी। मेरा मानना ​​है कि वैक्सीन लगाए गए लोगों और Covid-19 मुक्त जिलों में जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।"


दरअसल उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को चार धाम यात्रा पर रोक को 18 अगस्त, 2021 तक बढ़ा दिया था, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का फैसला नहीं हो जाता। राज्य सरकार ने पिछले महीने HC के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राज्य सरकार द्वारा 28 जून, 2021 के स्थगन आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई है।


उत्तराखंड सरकार ने 28 जून को चार धाम यात्रा पर रोक लगाने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें राज्य के तीन जिलों - चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के निवासियों के लिए 1 जुलाई से इसे आंशिक रूप से खोलने के राज्य के फैसले को पलट दिया गया था।


इसके बाद, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक बार फिर से चार धाम यात्रा पर 28 जुलाई तक रोक लगा दी थी। HC ने COVID-19 महामारी और खराब स्वास्थ्य तैयारियों को देखते हुए सरकार के फैसले को रोक दिया था।


चीफ जस्टिस आरएस चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की बेंच द्वारा 28 जुलाई, 2021 को दिए गए आदेश में कहा गया है, "राज्य के विद्वान महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर द्वारा दी गई रियायत को देखते हुए, ये न्यायालय निर्देश देता है कि स्टे ऑर्डर दिनांक 28.06.2021 तब तक जारी रहेगा, जब तक माननीय सुप्रीम कोर्ट उक्त SLP में अपना फैसला सुना नहीं देता।"


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