Tokyo Olympics: सेमीफाइनल में पहुंची लवलीना और सिंधू, लेकिन एक का मेडल पक्का और एक का नहीं, जानें ऐसा क्यों

कई लोगों का सवाल है कि सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचने पर ही लवलीना का मेडल कैसे पक्का हो गया
अपडेटेड Jul 31, 2021 पर 10:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टोक्यो ओलंपिक खेलों (Tokyo Olympic Games) में भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) की बदौलत भारत का दूसरा मेडल पक्का हो गया। लवलीना ने 69 किलोग्राम कैटेगरी में पूर्व वर्ल्ड चैम्पियन चीनी ताइपै की नियेन चिन चेन को हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है और अब उन्हें मेडल मिलना तय है। इस बीच कुछ लोगों का सवाल है कि सेमीफाइनल में पहुंचने पर ही लवलीना का मेडल कैसे पक्का हो गया और महिला सिंगल्स बैडमिंटन के सेमीफाइनल में पहुंची पीवी सिंधू (PV Sindhu) को मेडल मिलना क्यों तय नहीं हुआ?


भारतीय शटलर पीवी सिंधू ने टोक्यो ओलंपिक की महिला सिंगल्स प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 56 मिनट में 21 . 13 , 22 . 20 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। सिंधू अब मेडल से केवल एक कदम दूर हैं।


सेमीफाइनल में पहुंचने पर एक खिलाड़ी का मेडल पक्का और दूसरा का नहीं, इस अंतर को समझने के लिए हमें पहले दोनों खेल के नियमों को जानना भी जरूरी है।


लवलीना का मेडल कैसे पक्का?


असम की 23 साल की लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग की खलाड़ी हैं और जिसके नियम ये कहते हैं कि प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को ही कांस्य पदक (Bronze Medal) दिया जाता है। मतलब ये कि बॉक्सिंग में तीसरी रैंक के लिए मैच नहीं होता है।


इसलिए जैसे ही लवलीना ने चिन चेन को 4 . 1 से हरा कर सेमीफाइनल में जगह बनाई, वैसे ही उनको मेडल मिलना तय हो गया। हालांकि, अब मेडल कौनसा मिलेगा ये खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। सेमीफाइनल में लवलीना सामना मौजूदा वर्ल्ड चैम्पियन जुर्की की बुसानेज सुरमेनेली से होगा, जिन्होंने क्वार्टर फाइनल में अन्ना लिसेंको को मात दी।


वहीं अगर बात करें पीवी सिंधू की, जिन्होंने हाल ही में ओलंपिक में बैडमिंटन के सेमीफाइनल में शानदार जीत के साथ जगह बनाई है, तो बैडमिंटन में ऐसा कोई नियम नहीं होता है और यहां तीसरी रैंक यानी ब्रॉन्ज मेडल के लिए मैच होता है। इस वजह से ही सिंधू का मेडल अभी पक्का नहीं हुआ, हां लेकिन वे मेडल से केवल एक कदम ही दूर हैं।


इसी नियम की वजह से पहले भी मिले मेडल


याद कीजिए जब बीजिंग ओलंपिक में बॉक्सर विजेंदर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद मैरीकॉम ने लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीता था। इन दोनों ही मामलों में विजेंद्र सिंह और मैरीकॉम अपना-अपना सेमीफाइनल मैच हार गए थे, लेकिन बॉक्सिंग के इस नियम के तहत ही उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला था।


बता दें कि बॉक्सिंग में ये नियम शुरु से नहीं था। साल 1948 के ओलंपिक तक बॉक्सिंग में भी तीसरे स्थान के लिए मुकाबला होता था और उसी के आधार पर ब्रॉन्ज मेडल दिया जाता था। इस नियम में 1952 के ओलंपिक से बदलाव हुआ और तब से सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों ही खिलाड़ियों को ब्रॉन्ज मेडल दिया जाता है।


बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन से देश को गोल्ड की ही उम्मीद है। खुद लवलीना ने भी कहा कि अब मुझे गोल्ड मेडल के लिए तैयारी करनी है। ANI के मुताबिक, लवलीना ने कहा, "सबकी मदद से ही मैं अच्छा कर पाई। मेरा लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतने का है और अब मुझे गोल्ड मेडल के लिए तैयारी करनी है। अगला मैच मेरा सेमीफाइनल है, तो उसके लिए भी मुझे तैयारी करनी है।"


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