प्रदूषण फैलाने वाली और पुरानी कारों को सड़कों से हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी की घोषणा की। इसके तहत 15 वर्ष से पुराने कमर्शियल व्हीकल्स और 20 वर्ष से पुराने पर्सनल व्हीकल्स को स्क्रैप किया जा सकेगा। आठ वर्ष से पुरानी कारों का फिटनेस टेस्ट होगा। अगर वे टेस्ट में ठीक नहीं पाई जाती तो उस कार को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अगर कार इस टेस्ट में सही पाई जाती है तो हर बार फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू करवाने पर एक ग्रीन टैक्स (10-25 प्रतिशत) देना होगा। फिटनेस सर्टिफिकेट पांच वर्ष के लिए वैध होगा।
इसका मतलब है कि पुराने व्हीकल्स को रखने अब महंगा हो जाएगा।
मारुति सुजुकी, ह्युंडई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, BMW और वोक्सवैगन जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां देश में न्यूनतम या बिना डाउन पेमेंट के कारें लीज पर दे रही हैं। उदाहरण के लिए, मारुति सुजुकी के वैगनआर, स्विफ्ट, डिजायर, विटारा ब्रेजा और बलेनो सहित कई मॉडल्स को लीज पर लिया जा सकता है।
कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, शशांक श्रीवास्तव ने बताया, "लीज से कस्टमर को नई कार को खरीदे बिना उसका इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है। कस्टमर को एक मासिक फीस देनी होती है जिसमें मेंटेनेंस और इंश्योरेंस शामिल होती है।"
एक कार लीजिंग फर्म के CEO ने बताया कि कार लीजिंग का विकल्प युवाओं को पसंद आता है जो एक डेप्रिसिएशन वाला एसेट नहीं खरीदना चाहते। ऐसे कस्टमर्स अक्सर 3-5 वर्ष के अंतराल पर कार बदलते हैं।