साइलेंट किलर हैं एंटी-एजिंग दवाएं? हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद...एक्सपर्ट से जानिए इसके पीछे का पूरा साइंस

Anti Aging Medicine : ग्लूटाथियोन (Glutathione) इंजेक्शन आजकल एंटी-एजिंग और स्किन-लाइटनिंग ट्रीटमेंट के रूप में काफी चर्चा में हैं। कभी सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए उपलब्ध यह पॉलरफुल एंटीऑक्सीडेंट अब शहरों में रहने वाले कई लोगों के बीच तेजी से फेमस हो रहा है। चमकदार और जवान दिखने वाली त्वचा का वादा करने वाले इस इलाज के पीछे एक गंभीर खतरा भी छिपा है

अपडेटेड Jul 01, 2025 पर 6:50 PM
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एंटी-एजिंग दवाएं सेहत को कैसे पहुंचाती हैं नुकसान? (Photo Credit: Canva)

Anti Aging Medicine : बॉलीवुड एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला की मौत के बाद एंटी एजिंग ट्रीटमेंट की काफी चर्चा है। जानकारी के मुताबिक, शेफाली जरीवाला एंटी एजिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रही थीं। शेफाली जरीवाला ग्लोइंग स्किन के लिए मल्टीविटामिन और कोलेजन सप्लीमेंट्स का सेवन भी कर रही थीं। हांलाकि उनकी मौत की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आ पाई है। वहीं एक्ट्रेस की मौत के बाद अब ये सवाल उठता है कि क्या एंटी-एजिंग दवाएं सेहत पर गलत प्रभाव डालती हैं? तो आइए जानते हैं एंटी-एजिंग दवाओं के बारे में सबकुछ।

क्या है एंटी-एजिंग दवा

बता दें कि ग्लूटाथियोन (Glutathione) इंजेक्शन आजकल एंटी-एजिंग और स्किन-लाइटनिंग ट्रीटमेंट के रूप में काफी चर्चा में हैं। कभी सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए उपलब्ध यह पॉलरफुल एंटीऑक्सीडेंट अब शहरों में रहने वाले कई लोगों के बीच तेजी से फेमस हो रहा है। चमकदार और जवान दिखने वाली त्वचा का वादा करने वाले इस इलाज के पीछे एक गंभीर खतरा भी छिपा है । इस मुद्दे पर कई न्यूज18 मनीकंट्रोल ने कई एक्सपर्ट से बात की और ये जानने की कोशिश की कि, ग्लूटाथियोन की कितनी मात्रा शरीर के लिए सुरक्षित है और कब यह ब्यूटी ट्रीटमेंट जानलेवा साबित हो सकता है।


ग्लूटाथियोन क्या है और यह इतना चर्चा में क्यों है?

ग्लूटाथियोन एक प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है जिसे शरीर खुद बनाता है। यह हानिकारक फ्री रेडिकल्स को खत्म करने, लीवर को साफ करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसे अच्छी त्वचा और उम्र को रोकने वाले इलाज के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। खासकर IV इन्फ्यूजन (नसों में सीधे डाला जाना) के रूप में, जिससे यह ब्यूटि क्लीनिकों में काफी तेजी से फैल रहा है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

माहिम-फोर्टिस एसोसिएट के त्वचा विशेषज्ञ डॉ. शंकर सावंत ने बताया, “पिछले कुछ सालों में ग्लूटाथियोन के इस्तेमाल में काफी बढ़ोतरी हुई है और इसका सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है।” उन्होंने कहा, “लोग तुरंत गोरी और चमकदार त्वचा चाहते हैं। हालांकि ग्लूटाथियोन एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, लेकिन मरीज अक्सर तेज असर के लिए इसकी सामान्य खुराक से तीन से चार गुना ज़्यादा मांगने लगते हैं। यहीं से असली परेशानी शुरू होती है।”

डॉ. शंकर सावंत बताते हैं कि, ग्लूटाथियोन आमतौर पर सीमित मात्रा में (प्रति दिन शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर 20 से 40 मिलीग्राम) सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसकी ज़्यादा मात्रा दिल पर असर डाल सकती है। इससे दिल की धड़कनों में गड़बड़ी या ब्लड प्रेशर गिर सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से दिल की कोई समस्या हो और उन्हें इसका पता न हो। एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाएं भी अक्सर देखने को मिलती हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि, "ग्लूटाथियोन को त्वचा को गोरा करने के लिए किसी मेडिकल संस्था ने मंजूरी नहीं दी है, इसे सिर्फ एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर दिल के मरीजों को बिना डॉक्टर की निगरानी के इस तरह का IV इन्फ्यूजन बिल्कुल नहीं लेना चाहिए।”

हार्ट के लिए कितना है सेफ?

अमृता अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने ग्लूटाथियोन और अन्य IV ड्रिप के अनियंत्रित उपयोग को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "अगर बिना किसी हार्ट चेकअप के ये इंजेक्शन लिए जाएं तो इससे इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन, ब्लड प्रेशर में गिरावट और कमजोर दिल वाले मरीजों में गंभीर हृदय समस्याएं हो सकती हैं।" डॉ. कुमार का मानना है कि असली खतरा दवा से नहीं, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल से है — जैसे ज्यादा खुराक लेना, खाली पेट देना या दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर लेना। बहुत से लोगों को यह तक नहीं पता होता कि उन्हें पहले से दिल से जुड़ी कोई समस्या है, जैसे अनियमित धड़कन या कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

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