Fatty Liver: क्या आपके शरीर में हो रहे हैं ये बदलाव, जानिए फैटी लिवर के शुरुआती संकेत

Fatty Liver: फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर में वसा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे लिवर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि इसके शरीर और त्वचा पर क्या प्रभाव पड़ते हैं।

अपडेटेड Aug 28, 2025 पर 5:24 PM
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फैट्टी लिवर बीमारी आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन गई है, जिससे कई लोगों को शुरुआती समय में पता भी नहीं चलता। यह बीमारी तब होती है जब लिवर में फैट की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो जाती है। अगर समय रहते इसका पता चल जाए और सही उपचार शुरू किया जाए, तो गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। खास बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर त्वचा पर कुछ बदलावों के रूप में भी नजर आते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।

फैट्टी लिवर से जुड़ा पहला महत्वपूर्ण संकेत चेहरे में सूजन या फुलाव हो सकता है। जब लिवर सही तरीके से प्रोटीन नहीं बना पाता तो शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे चेहरे के हिस्से मोटे या फूले हुए दिख सकते हैं। हालांकि यह अकेला संकेत बीमारी की निशानी नहीं होता, लेकिन अगर अन्य लक्षण भी दिखें तो लिवर की जांच कराना चाहिए।

दूसरा संकेत है त्वचा की रंगत में बदलाव, खासकर गर्दन और त्वचा के मोड़ों पर काले दाग या मोटे फ्लोल्ड्स का बनना। यह स्थिति इंडेक्स नाइग्रिकंस कहलाती है, जो कि इंसुलिन रेसिस्टेंस की वजह से होती है। जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है या मेटाबोलिक समस्याएं होती हैं, उनमें ये निशान जल्दी नजर आने लगते हैं। ये बदलाव धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लिवर की खराबी का एक सूचक होते हैं।


तीसरा और खास लक्षण है बार-बार होने वाली खुजली और त्वचा में जलन। फैटी लिवर के कारण शरीर में बैली साल्ट्स (पित्त लवण) जमा हो जाते हैं, जो त्वचा को जलन और खुजली के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस खुजली से निजात मिलाना आम दवाओं से कठिन हो सकता है और कभी-कभी चेहरे पर पोषण की कमी के कारण भी रैशेज हो जाते हैं।

फैट्टी लिवर का डायग्नोशिस केवल त्वचा की इन समस्याओं से संभव नहीं होता, लेकिन ये संकेत डॉक्टर से परामर्श करने की अनुशंसा करते हैं, खासकर अगर पारिवारिक इतिहास में कोई लिवर संबंधी बीमारी हो या मोटापा, मधुमेह जैसी जोखिम कारक मौजूद हों।

इस बीमारी से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव बहुत जरूरी हैं। शुरूआती दौर में इस पर कंट्रोल कर लेने से नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) और नॉन-अल्कोहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस (NASH) जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

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