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सावधान! दिमाग को चुपचाप खोखला कर रहा है ये खतरा, जब तक समझ आए, बहुत देर हो चुकी होती है

कभी-कभी आपकी बचपन की चोट या आपकी कुछ आदतें आपके लिए और आपके दिमाग के लिए बड़ खतरा बन सकती हैं । और ये आपके सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। आपके बचपन की चोट डिमेंशिया बनकर आपके दिमाग को खोखला कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे कौन से कारक हैं जो आपके दिमाग को कमजोर कर रही हैं।

Translated By: Shradha Tulsyanअपडेटेड Aug 03, 2025 पर 3:37 PM
सावधान! दिमाग को चुपचाप खोखला कर रहा है ये खतरा, जब तक समझ आए, बहुत देर हो चुकी होती है

कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आप बिल्कुल ठीक हो ना सिर दर्द, ना चक्कर, ना कोई कमजोरी लेकिन कभी-कभी छोटी बातें भूल जाते हैं जैसे चाबी कहां रखी थी या फोन किस कमरे में छोड़ा। आप इसे उम्र का असर मानकर टाल देते हैं। लेकिन हो सकता है कि आपके दिमाग में कुछ ऐसा हो रहा हो जिसे आप न तो देख सकते हैं और न ही महसूस कर सकते हैं और यही चुपचाप बढ़ रहा खतरा आने वाले सालों में आपकी याददाश्त, सोचने-समझने की ताकत और पहचानने की क्षमता को छीन सकता है। इसके पीछे का कारण हो सकता है साइलेंट ब्रेन इन्फार्क्ट यानी मौन मस्तिष्क रोधगलन ।

क्या होता है साइलेंट ब्रेन इन्फार्क्ट ?

ये छोटे-छोटे स्ट्रोक की तरह होते हैं जो आपके दिमाग में तब होते हैं जब खून का प्रवाह कुछ सेकंड्स या मिनट्स के लिए रुक जाता है। खून नहीं पहुंचता, तो उस हिस्से के ब्रेन सेल्स मरने लगते हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इसका कोई लक्षण नहीं होता न कोई चक्कर, न बोलने में दिक्कत, न चलने में परेशानी, यही कारण है कि इन्हें साइलेंट यानी मौन कहा जाता है। लेकिन जब एमआरआई या सीटी स्कैन कराया जाता है तो पता चलता है कि दिमाग के अंदर छोटी-छोटी चोटें मौजूद हैं।

ये चोटें क्यों खतरनाक हैं?

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