Stress and Smoking: तनाव आधुनिक जीवन शैली का एक अपरिहार्य हिस्सा बन गया है। यह अक्सर बिना बुलाए ही सामने आ जाता है। जैसे किसी बड़े प्रेजेंटेशन से पहले तेजी से कई तरह के विचार आना, ट्रैफिक में बेचैनी होना, या किसी अनसर्टेनिटी के क्षणों में पेट में जकड़न होना। हालांकि कुछ तनाव हमारे फोकस और प्रदर्शन को बेहतर भी कर सकते है। तनाव हमारी नींद, पाचन और सोचने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे तनाव से बचने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं जो हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकते है। आज के समय में तनाव को कम करने के लिए सबसे ज्यादा प्रचलित तरीका बन गया है स्मोकिंग करना।
स्मोकिंग करने वालों के लिए यह पहली नजर में टेंशन से बचने का एक त्वरित समाधान जैसा लग सकता है। सिगरेट पीने से तुरंत राहत की भावना, अनसर्टेनिटी के बीच सुकून का एक पल फील होता है। हालांकि इससे थोड़े समय के लिए राहत तो मिल सकती है लेकिन इससे शरीर के अंदर जो हो रहा है वह कहीं अधिक खतरनाक है। आइए आपको बताते हैं क्या हो सकता है इसका असर?
निकोटीन डोपामाइन का लेवल बढ़ाकर कराता है राहत का एहसास
निकोटीन, तंबाकू में पाया जाने वाला एडिक्शन से भरा उत्तेजक पदार्थ होता है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा में आंतरिक चिकित्सा की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शोवना वैष्णवी कहती हैं, 'जब सांस के साथ इसे लिया जाता है, तो निकोटीन तेजी से मस्तिष्क तक पहुंचता है, जिससे डोपामाइन का एक बड़ा प्रवाह शुरू होता है। यह डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर होता है जिसे आनंद और राहत की भावनाओं को उत्पन्न करने के लिए जाना जाता है। टेंशन या अवसाद से जूझ रहे किसी व्यक्ति के लिए, जिसमें डोपामाइन का स्तर कम होता है, उसके लिए यह तत्काल राहत जैसा महसूस करा सकता है।'
हालांकि, यह राहत अस्थायी होती है। इससे मिलने वाले राहत के मुकाबले इसकी कीमत बहुत अधिक है। डॉ. वैष्णवी बताती हैं, 'समय के साथ मस्तिष्क निकोटीन के लिए अधिक रिसेप्टर्स का उत्पादन करके समायोजित हो जाता है, अनिवार्य रूप से खुद को इस पर निर्भर होने के लिए फिर से तैयार करता है। जब निकोटीन का स्तर गिरता है, तो वे अतिसक्रिय रिसेप्टर और अधिक निकोटीन की डिमांड करते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी और टेंशन की भावनाएं तेज हो जाती हैं। जो कभी तनाव से रिलीफ देने का काम करती तो वो अब इसका एक स्रोत बन जाती है। स्मोकिंग करने वाला अपने दिमाग को शांत नहीं कर रहा है वो अपनी डोज बढ़ा कर इस पर अपनी निर्भरता को और बढ़ावा दे रहे हैं।'
कई लोग आत्म-शांत करने के लिए स्मोकिंग का सहारा लेते हैं। रिसर्च से पता चला है कि स्मोकिंग वास्तव में लंबी अवधि में तनाव और चिंता को बढ़ाता है। डॉ. वैष्णवी कहती हैं, 'मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों विशेष रूप से अवसाद वाले लोगों के स्मोकिंग करने की अधिक संभावना होती है। निकोटीन समस्या की जड़ का इलाज नहीं करता है; यह केवल उसे छिपाता है। जब टेंशन बढ़ती है, तो निकोटीन के लिए दिमाग की चाहत सिर्फ एक बुरी आदत से कहीं अधिक होती है। यह लत से पैदा हुई एक केमिकल इच्छा है। यही कारण है कि स्मोकिंग से मुक्ति के लिए केवल इच्छाशक्ति से कहीं अधिक की आवश्यकता होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।