Thick Heart Syndrome: हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM), जिसे 'थिक हार्ट सिंड्रोम' भी कहा जाता है। यह एक आनुवंशिक रोग है। इसकी वजह से हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं जिसकी वजह से हृदय रक्त को ठीक से पंप नहीं कर पता है। इसका प्रभाव ये होता है कि लोगों में हार्ट फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। जानकारी के मुताबिक यह दुनिया भर में हर 200 लोगों में से 1 को प्रभावित करता है। इस अनुमान के मुताबिक भारत में भी करीब 7.2 मिलियन लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है इसके लक्षण और इससे कैसे पाया जा सकता है निजात।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित नेफ्रोलॉजिस्ट, एमडी मेडिसिन डीएम नेफ्रोलॉजी, डॉ. ऋचा पांडे के अनुसार, 'HCM वाले कई लोगों में कोई लक्षण नहीं होते हैं और उन्हें यह पता भी नहीं चलता कि उन्हें यह बीमारी है, जिससे यह एक 'साइलेंट किलर' बन जाती है। हालांकि, कुछ लोगों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण अनुभव हो सकते हैं। उन लोगों में ये लक्षण खासकर वर्कआउट करने के दौरान महसूस होते है। डॉक्टर कभी-कभी शारीरिक परीक्षण के दौरान दिल में मर्मर (हार्ट मर्मर) सुनकर या खराब रक्त प्रवाह के लक्षणों को देखकर HCM का पता लगा सकते हैं।
यदि आपको वर्कआउट करते समय चक्कर या सीने में दर्द का अनुभव होता है, तो तुरंत रुक जाए और मेडिकल हेल्प लें। क्योंकि ये संकेत HCM या अन्य गंभीर हृदय समस्याओं के संकेत हो सकते हैं।"
कैसे होती है 'थिक हार्ट सिंड्रोम' की पहचान?
फिट्ट्र (Fittr) के संस्थापक और सीईओ जितेंद्र चौकसे के अनुसार, 'यह स्थिति ऑटोसोमल डोमिनेंट है, जिसका अर्थ है कि प्रभावित माता-पिता के प्रत्येक बच्चे में म्यूटेशन में मिलने की 50% संभावना होती है। हालांकि, पारिवारिक इतिहास के बिना भी एचसीएम डे नोवो म्यूटेशन के कारण हो सकता है। चूंकि एचसीएम परिवारों में चलता है, इसलिए एचसीएम वाले किसी व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों का नियमित रूप से टेस्ट किया जाना चाहिए।
'थिक हार्ट सिंड्रोम' से कैसे मिल सकता है छुटकारा?
थिक हार्ट सिंड्रोम का इलाज स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। बीटा-ब्लॉकर्स और कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स जैसी दवाएं हृदय को आराम देने और रक्त प्रवाह को नियमित करने में मदद कर सकती है। गंभीर मामलों में, मांसपेशियों की मोटाई को कम करने के लिए सर्जरी या अचानक हार्ट फेल से मृत्यु को रोकने के लिए एक इम्प्लांटेबल डिफाइब्रिलेटर (ICD) की आवश्यकता हो सकती है। असली चिंता की बाते ये है कि, भारत में एचसीएम मामलों को ट्रैक करने के लिए कोई सेंट्रल पोर्टल नहीं है, और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए कोई अनिवार्य स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी नहीं हैं।