Watermelon: गर्मी के मौसम में लोग खूब तरबूज खाते हैं। तरबूज ऐसा फल है जिसमें फाइबर और पानी दोनों भरपूर मात्रा में पाया जाता है। दिखने में लाल और मीठे और पानी से भरपूर तरबूज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। बच्चों से लेकर बड़े सभी गर्मियों में खूब तरबूज खाते हैं। तरबूज में काफी सारे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। गर्मियों में इसकी डिमांड बढ़ने से इस फल को जल्दी पकाने के लिए केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है। केमिकल से पकाए गए तरबूज सेहत के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं हैं।
केमिकल के इस्तेमाल से तरबूज जल्द पक जाता और लाल रंग का दिखने लगता है। ऐसे में बहुत से लोग नहीं पहचान पाते हैं कि तरबूज आखिरकार कैसे पकाया गया है? लिहाजा नेचुरल तरीके से पकाया गया तरबूज और केमिकल से पकाए गए तरबूज की पहचान करना जरूरी है।
केमिकल से पकाए गए तरबूज की कैसे करें पहचान
लखनऊ राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य और डीन, प्रोफेसर माखन लाल का कहना है कि तरबूज जमीन पर उगाए जाते हैं। उनमें अक्सर दाग और सफेद निशान होते हैं। इससे पता चलता है कि यह नेचुरल तरीके से पका है। वहीं अगर तरबूज को केमिल से पकाया गया है तो रखे गए सभी तरबूज एक समान लाल होते हैं। उनमें किसी भी तरह का दाग या निशान नहीं होता है। इसका मतलब ये है कि रात भर में केमिकल से पकाया गया है। वहीं अगर तरबूज को काटने के बाद आपको इसके बीच में दरार या कई छेद दिखाई देते हैं, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि तरबूज को केमिकल की मदद से पकाया गया है। प्राकृतिक रूप से पके फल में ऐसी दरार नहीं दिखाई देती है।
केमिकल से पका तरबूज कम मीठा होता है
केमिकल से पकाए गए तरबूज की प्राकृतिक मिठास में जरूर बदलाव आएगा। तरबूज की मिठास कम हो जाएगी। अगर तरबूज को काटने पर वह लाल रंग का दिखाई देता है, लेकिन उसमें मिठास की कमी होती है तो समझ जाएं कि यह केमिकल का कमाल है।
केमिकल से पके तरबूज से कैंसर का खतरा
तरबूज में कई बार लाल कलर का रंग मिला दिया जाता है। केमिकल के जरे पकाए गए तरबूज सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इससे कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। अगर केमिकल से पकाए गए तरबूज का सेवन बच्चे करते हैं तो उनकी सेहत भी बिगड़ सकती है।