Health Tips: दालें और सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकी अधिक मात्रा भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। हेल्थ कोच नीपा आशाराम ने हाल ही में बताया कि उनकी रोजमर्रा की खाने की गलतियों में 'बहुत ज्यादा दाल और सब्जियां खाना' शामिल थीं, जिससे उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हो रही थीं। क्या सच में दाल और सब्जियां ज्यादा खाने से समस्या हो सकती है? आइए इसे एक्स्पर्ट्स से समझते हैं।
क्या दाल और सब्जियां ज्यादा खाना वाकई नुकसानदायक हो सकता है?
दालें और सब्जियां बेशक एक स्वस्थ आहार का अनिवार्य हिस्सा हैं। वे प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर होती हैं। आर.आर. नगर के एसएस स्पार्श हॉस्पिटल में क्लीनिकल डाइटिशियन आसा एंटो सी का कहना है कि, 'हालांकि, इनका अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। मूंग या मसूर जैसी दालों को बड़ी मात्रा में तेल, घी या मलाईदार टॉपिंग के साथ बनाया जाता है, तो उसमें कैलोरी का अधिभार हो सकता है। उनका अत्यधिक सेवन समय के साथ वजन बढ़ने में योगदान कर सकता है।
आसा एंटो सी ने कहा, 'इसके अलावा, ज्यादा तेल या मसालेदार ग्रेवी में पकी हुई सब्जियां कैलोरी की खपत को काफी बढ़ा सकती हैं।' एंटो ने जोर देकर कहा, 'एक ही प्रकार के भोजन पर अत्यधिक निर्भरता, भले ही वे दालें या सब्जियां जैसे स्वस्थ हों, आपके शरीर को आवश्यक अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से वंचित कर सकती है।'
'अपच, गैस या सूजन का कारण बन सकती है अत्यधिक दाल और सब्जियां'
डाइटिशियन एंटो ने कहा, 'दाल का सेवन प्रति भोजन 1-2 छोटी सर्विंग तक सीमित करें, इसे कम तेल में पकाएं। इसे क्विनोआ या ब्राउन राइस जैसे साबुत अनाज के साथ मिलाएं। सब्जियों के पोषक तत्वों को संरक्षित करने के लिए उन्हें हल्का पकाएं। इनसे उत्पन्न होने वाली समस्याओं से बचने के लिए इनके क्वांटिटी पर संयम रखने के साथ खाने में विविधता पर ध्यान दें।
चंदुरकर ने बताया कि फाइबर को धीरे-धीरे बढ़ाएं और हाइड्रेटेड रहें ताकि आपके शरीर को पचाने में मदद मिल सके। ये सुनिश्चित करें कि आपकी खाने की प्लेट में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ हों, जिनमें साबुत अनाज, सब्जियां, दालें और हेल्दी वसा शामिल हों। दालों, सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन के नियंत्रित हिस्सों के साथ एक संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य और वजन संतुलन बनाए रखने की कुंजी है। चंदुरकर ने कहा, 'केवल सब्जियां खाना और वसा और प्रोटीन जैसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स के अन्य रूपों का सेवन न करना अंततः पोषण संबंधी कमी या असंतुलन का कारण बन सकता है।