एयर इंडिया (Air India) के एक पायलट का लाइसेंस एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। डोयरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA ने आज 22 जून को यह कार्रवाई की। दरअसल, पायलट ने 3 जून को चंडीगढ़-लेह फ्लाइट के कॉकपिट में अपनी महिला मित्र को जाने की इजाजत दी थी, जिसके चलते उन पर यह कार्रवाई की गई है। पायलट पर आरोप है कि उन्होंने अनधिकृत व्यक्ति को रोका नहीं और न ही इस घटना की सूचना दी।
DGCA ने कहा कि एयरक्राफ्ट रूल्स 1937 के तहत अपने अधिकार का दुरुपयोग करने और लागू डीजीसीए नियमों के उल्लंघन करने के चलते पायलट का लाइसेंस एक वर्ष की अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि सेफ्टी और सिक्योरिटी की लिहाज से लेह मार्ग देश के सबसे कठिन और सेंसेटिव हवाई मार्गों में से एक है। किसी कमर्शियल एयरक्राफ्च के कॉकपिट में किसी अनधिकृत व्यक्ति को आने देना कानून का उल्लंघन है।
फर्स्ट ऑफिसर पर भी हुई कार्रवाई
एविएशन रेगुलेटर ने एयर इंडिया की फ्लाइट AI-458 के फर्स्ट ऑफिसर को भी एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। फर्स्ट ऑफिसर पर यह कार्रवाई नियम के उल्लंघन को रोकने में विफल रहने और इसकी सूचना नहीं देने के चलते की गई है। इस घटना को लेकर एयर इंडिया ने 13 जून को दो पायलटों को डी-रोस्टर (फ्लाइट ड्यूटी से हटाना) कर दिया था। केबिन क्रू से शिकायत मिलने के तुरंत बाद एयरलाइन मैनेजमेंट ने पायलट और को-पायलट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
एयर इंडिया की फ्लाइट में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। 27 फरवरी को दुबई-दिल्ली फ्लाइट के दौरान एक पायलट ने अपनी गर्लफ्रेंड को कॉकपिट में जाने की इजाजत दी थी। इस दौरान पायलट ने क्रू से उसके लिए तकिये मंगवाए और शराब परोसने को कहा। हालांकि, क्रू ने कॉकपिट में शराब परोसने से मना किया तो पायलट भड़क गया। इसके बाद डीजीसीए ने पायलट का लाइसेंस तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया था और 'सेफ्टी-सेंसेटिव' इश्यू पर तुरंत कार्रवाई नहीं करने के लिए एयर इंडिया पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।