'CAA किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता', सीएए पर फिलहाल कोई रोक नहीं, SC ने केंद्र से मांगा जवाब

CAA implementation: करीब 200 याचिकाओं में आग्रह किया गया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का शीर्ष अदालत द्वारा निपटारा किए जाने तक संबंधित नियमों पर रोक लगाई जानी चाहिए। सरकार ने पीठ से कहा, 'CAA किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता।''

अपडेटेड Mar 19, 2024 पर 4:16 PM
CAA implementation: सरकार ने नागरिकता के लिए अप्लाई करने वाले लोगों के लिए नया पोर्टल शुरू किया है

CAA implementation: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court On CAA) ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। देशभर से CAA के खिलाफ दाखिल 200 से अधिक याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (19 मार्च) से सुनवाई शुरू की। शीर्ष अदालत ने फिलहाल सीएए पर किसी भी तरह की रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह करने वाले आवेदनों पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ मामले में अब 9 अप्रैल को सुनवाई करेगी। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि उन्हें 20 आवेदनों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय चाहिए।

सुनवाई के दौरान CJI ने केंद्र सरकार से पूछा कि नोटिफिकेशन पर रोक की मांग वाली याचिका पर जवाब देने के लिए उनको कितना समय चाहिए? इस पर केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल ने 4 हफ्ते का का समय मांगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को तीन हफ्ते का समय दिया है मामले में अब अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।


याचिकाकर्ताओं की क्या है मांग?

इन आवेदनों में आग्रह किया गया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का शीर्ष अदालत द्वारा निपटारा किए जाने तक संबंधित नियमों पर रोक लगाई जानी चाहिए। मेहता ने पीठ से कहा, ''यह (CAA) किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता।''

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संसद द्वारा विवादास्पद कानून पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र ने 11 मार्च को संबंधित नियमों की अधिसूचना के साथ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। इस कानून में 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को तेजी से भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है।

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