Chandrayaan 3 Landing Live: चांद पर लैंडर का सॉफ्ट लैंडिंग क्यों है जरूरी?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का तीसरा महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल बुधवार शाम चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए तैयार है। इसी के साथ भारत पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह के रहस्यमयी दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की उपलब्धि हासिल करने वाला पहला देश बनने के लिए उत्सुक है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान से लैस लैंडर मॉड्यूल के बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखने की संभावना है। इसी लैंडर के अंदर रोवर रखा हुआ है, जो चांद के लूनर साउथ पोल से जानकारी जुटाकर इसरो को भेजेगा।
सॉफ्ट लैंडिंग वह जगह है जहां लैंडर नियंत्रित तरीके से चांद की सतह पर उतरता है। इसके बाद लैंडर मॉड्यूल की गति धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसके विपरीत हार्ड लैंडिंग एक क्रैश लैंडिंग है, जहां लैंडर मॉड्यूल सतह से टकराते ही नष्ट हो जाता है। चार साल पहले चंद्रयान 2 सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान फेल हो गया था। हालांकि, इस बार इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने आश्वासन दिया है कि भले ही सब कुछ विफल हो जाए, लेकिन सॉफ्ट लैंडिंग जरूर होगी।