Chandrayaan-3 Updates: भारत 48 घंटे से भी कम समय में इतिहास रचने के लिए तैयार है, क्योंकि उसका तीसरा मून मिशन (Moon Mission) 23 अगस्त, 2023 को शाम 6:04 बजे (IST) के आसपास चंद्रमा के साउथ पोल पर एक सॉफ्ट लैंडिंग (Soft Landing) के लिए तैयार है। सोमवार को, ISRO ने चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) लैंडर मॉड्यूल और अभी भी ऑर्बिट में घूम रहे चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के बीच टू-वे कम्यूनिकेशन सफलतापूर्वक स्थापित किया। इससे पहले आज, अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा के दूर के हिस्से की तस्वीरें भी जारी की थीं, जिसमें चांद की सतह पर गड्ढे दिखाई दे रहे थे। इस फोटो चंद्रयान -3 के लैंडर हैज़र्ड डिटेक्शन और अवॉइडेंस कैमरे (LHDAC) से कैप्चर किया गया था।
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर-ISRO, अहमदाबाद के डायरेक्टर नीलेश एम. देसाई ने चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए कहा, 23 अगस्त को, चंद्रयान-3 के उतरने से दो घंटे पहले, हम लैंडर मॉड्यूल के स्वास्थ्य और चंद्रमा पर स्थितियों के आधार पर इस पर निर्णय लेंगे कि लैंडिंग करना सही है या नहीं। अगर किसी वजह से कुछ गड़बड़ी लगती है, तो हम मॉड्यूल की लैंडिंग को 27 अगस्त तक के लिए टाल देंगे। हमारा मकसद सॉफ्ट लैंडिंग है और हम 23 अगस्त को मॉड्यूल की लैंडिंग को अंजाम देने के बारे में आश्वस्त हैं।
चंद्रयान-3 के सफल होने की उम्मीद यूं तो पूरी है, फिर एक आशंका कहीं न कहीं लोगों के मन में रहती ही है, क्योंकि चंद्रयान-2 के समय में एक झटका हमें लग चुका है। हालांकि, ऐसी कई तरह की आशंकाओं को दूर करते हुए ISRO प्रमुख एस सोमनाथ (S Somanath) पहले ही बता चुके हैं कि चंद्रयान-3 के पास किसी भी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक लैंडिंग साइट पर उतरने की बेहतरीन क्षमता है।
एजेंसी ने इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए चंद्रमा पर लैंडिंग एरिया को 4 Km x 2.5 Km तक बढ़ा दिया है। सोमनाथ ने आत्मविश्वास दिखाते हुए कहा, “हम साउथ पोल के पास एक खास प्वाइंट को टारगेट करेंगे, लेकिन किसी भी कारण से, अगर इसका प्रदर्शन खराब रहा, तो ये उस एरिया के भीतर कहीं भी उतर सकता है। इसके अलावा, हमने इसे वैकल्पिक साइट तक का सफर तय करने के लिए ज्यादा ईंधन और क्षमता दी है। लेकिन ये इस निश्चित रूप से लैंड करेगा।"
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद भारत उन कुछ खास देश- सोवियत संघ, चीन और अमेरिका में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने अतीत में सफल मून लैंडिंग की है।
ISRO चीफ ने कहा था, भले ही चंद्रयान-2 क्रैश हो गया, लेकिन ये चांद की सतह की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें देने में सक्षम था। इसी डिटेल का इस्तेमाल ISRO ने चंद्रमा की अगली यात्रा के लिए लैंडिंग साइट को अंतिम रूप देने के लिए किया था।
उन्होंने आगे कहा, "इस बार हम लैंडिंग साइट के सभी डिटेल जानते हैं - बोल्डर, क्रेटर, सब कुछ अच्छी तरह से मैप किया गया है।"
Chandrayaan-3 Updates: चांद पर पानी की तलाश
अंतरिक्ष एजेंसी का इरादा साउथ पोल के पास पानी की मौजूदगी का और पता लगाने का भी है। 2008 में ISRO ने अपने पहले चंद्र मिशन के साथ चंद्रमा पर पानी होने का सबूत दिया था।
उन्होंने कहा, “ये इस बार भी लक्ष्यों में से एक है। कम धूप वाले इलाकों में सब-सरफेस वाटर खोजने की बेहतर संभावनाएं हैं, इसलिए हम निश्चित रूप से ये प्रयास करेंगे। क्योंकि इस क्षेत्र में कभी कोई नहीं पहुंचा है, इसलिए ये निश्चित रूप से दिलचस्प होगा।"
ये मिशन एजेंसी के सबसे भारी रॉकेट - GSLV Mk3 (LVM-3) पर 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था और ये 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने को तैयार है। ये चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला पहला लैंडर होगा। ISRO ने रविवार को बताया कि विक्रम रोवर 23 अगस्त को शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के सतह पर उतरेगा।