भारत चीन सीमा (India China Border) पर तनाव लगातार बरकरार है। अब खबर आई है कि चीनियों ने पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) के डेमचोक (Demchok) में चारडिंग नाला के भारतीय हिस्से में टेंट लगाए हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इन टेंट में रहने वाले लोगों को "तथाकथित नागरिक" बताया और कहा कि भारत उन्हें वापस जाने के लिए कह रहा है, लेकिन "उनकी उपस्थिति बनी हुई है।"
डेमचोक में पहले भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हो चुका है। 1990 के दशक में भारत-चीन ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप्स (JWG) की बैठकों के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि डेमचोक और ट्रिग हाइट्स वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर विवादित बिंदु थे।
बाद में, नक्शों के आदान-प्रदान के बाद, LAC पर मौजूद 10 क्षेत्रों को मान्यता दी गई: समर लुंगपा, डेपसांग बुलगे, प्वाइंट 6556, चांग्लुंग नाला, कोंगका ला, पैंगोंग त्सो नॉर्थ बैंक, स्पंगगुर, माउंट सजुन, डमचेले और चुमार।
अधिकारियों ने कहा कि इन 12 क्षेत्रों के अलावा, जो या तो परस्पर विवादित हैं या जहां दोनों पक्षों की अलग-अलग धारणाएं हैं कि LAC कहां स्थित है, मौजूदा गतिरोध शुरू होने के बाद, पिछले साल पूर्वी लद्दाख में LAC में पांच फ्रिक्शन प्वाइंट्स जोड़े गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि ये प्वाइंट गालवान घाटी में KM120, श्योक सुला क्षेत्र में PP15 और PP17A, रेचिन ला और रेजांग ला हैं।
हालांकि, मामले से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि कोर कमांडर लेवल पर बातचीत में देरी के बावजूद दोनों पक्ष हॉटलाइन पर लगातार संपर्क में हैं। अधिकारियों ने कहा कि गतिरोध शुरू होने के बाद से, दोनों पक्षों ने दौलत बेग ओल्डी और चुशुल में हॉटलाइन पर लगभग 1,500 बार मैसेजों का आदान-प्रदान किया है।
सूत्रों ने कहा कि बातचीत आगे नहीं बढ़ी है, क्योंकि भारत पहले सभी फ्रिक्शन प्वाइंट्स से पीछे हटने पर जोर दे रहा है। वहीं चीन चाहता है कि सेनाएं पीछे हटें और जो अतिरिक्त सेनाएं बुलाई गई हैं, उन्हें वापस अपनी जगहों पर भेजा जाए।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि फिलहाल स्थिति स्थिर है। अधिकारी ने कहा कि हालांकि, ये अभी ये 2019 की तरह नहीं हैं, ये पिछले साल की तुलना में "काफी बेहतर" है। फरवरी के बाद से चीन द्वारा न तो कोई "कोई उल्लंघन" किया गया है और न ही दोनों सेनाओं के बीच कोई आमना-सामना हुआ है।