आंध्र प्रदेश ने आयातित कोयले के लिए रद्द कीं Adani Enterprises की बिड, ऊंची कीमत बताई वजह

हाल के वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि आयातित कोयले के किसी प्रमुख सरकारी टेंडर को ऊंची कीमतों की वजह से रद्द किया गया है

अपडेटेड Apr 04, 2022 पर 9:24 AM
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भारत सरकार ने घरेलू बाजार में कोयले की कमी को दूर करने के लिए कंपनियों से कोयले का आयात बढ़ाने के लिए कहा है

Adani Enterprises : आंध्र प्रदेश ने दो अलग-अलग टेंडर्स में आयातित कोयले की आपूर्ति के लिए अडानी एंटरप्राइजेस (Adani Enterprises) द्वारा जमा की गईं बिड्स निरस्त कर दी हैं। राज्य सरकार ने रॉयटर्स को यह जानकारी देते हुए कहा कि अडानी ने बहुत ऊंची कीमतों का उल्लेख किया था।

हाल के वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि आयातित कोयले के किसी प्रमुख सरकारी टेंडर को ऊंची कीमतों की वजह से रद्द किया गया है। अभी इसका विवरण नहीं मिल सकता है।

कोयले के आयात पर है भारत का जोर


भारत ने घरेलू बाजार में कोयले की कमी को दूर करने के लिए कंपनियों से कोयले का आयात बढ़ाने के लिए कहा है। हालांकि, महंगे आयात से राज्य सरकार के स्वामित्व वाली, कर्ज के बोझ से दबी बिजली की डिस्ट्रीब्यूटर्स की आर्थिक दिक्कतें बढ़ सकती है, जिन पर बिजली उत्पादकों का लगभग 15 अरब डॉलर बकाया है।

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अडानी ने इतनी लगाई थी बोली

अधिकारियों ने कहा, भारत में कोयले की सबसे बड़ी ट्रेडर अडानी (Adani) ने पिछले महीने 40,000 रुपये (526.50 डॉलर) प्रति टन पर 5,00,000 टन साउथ अफ्रीकन कोयले और जनवरी में 17,480 रुपये (230.08 डॉलर) पर 7,50,000 टन कोयले की एक अन्य खेप की आपूर्ति की पेशकश की थी।

जनवरी से तेजी से बढ़ी हैं कीमतें

इंडोनेशिया द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध के चलते बेंचमार्क साउथ अफ्रीकन कोयले की कीमतें जनवरी में बढ़ते हुए 176.50 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जो रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) के चलते मार्चे में 441.65 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई थीं।

अधिकारियों ने कहा, दोनों टेंडर इसलिए निरस्त किए गए, क्योंकि कीमतें खासी ऊंची बोली गई थीं। उन्होंने कहा कि अडानी 5,000 टन के टेंडर में अकेली बिडर थी, जबकि 7,50,000 टन के टेंडर में अग्रवाल कोल ने भी बिड लगाई थी जिसने अडानी की तुलना में ऊंची बोली लगाई थी।

अडानी और अग्रवाल ने इस संबंध में भेजे गए ईमेल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अक्टूबर और मार्च में पैदा हुआ था बिजली संकट

बिजली की बढ़ती मांग के बीच भारत को अक्टूबर और मार्च के दौरान हाल के वर्षों की सबसे ज्यादा बिजली की कमी का सामना करना पड़ा था। हालांकि भारत में कोयले के उत्पादन पर एकाधिकार रखने वाली कोल इंडिया द्वारा रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद ऐसा हुआ था।

उक्त अधिकारियों में से एक आंध्र प्रदेश पावर जेनरेशन कॉर्प लि. के प्रबंध निदेशक बी श्रीधर ने कहा कि बिजली का संकट उतना ज्यादा नहीं है जितना अक्टूबर में था, लेकिन राज्य समान मांग और आपूर्ति की स्थिति में है। श्रीधर ने रॉयटर्स को बताया, हमने स्टॉक नहीं किया है। हालांकि, ज्यादा खनन के कारण स्थानीय स्तर पर कोयला उपलब्ध है, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन की समस्या बनी हुई है।

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