सरकार फाइनेंस बिल में TCS फाइलिंग में देरी को भी अपराध की श्रेणी से हटा सकती है, CBDT चैयरमैन ने दी जानकारी

सरकार ने 23 जुलाई को पेश बजट में टीडीएस डिपॉजिट के नियमों को आसान बनाने का ऐलान किया था। इसमें कहा गया था कि अगर टीडीएस का पैसा तिमाही रिटर्न फाइलिंग तक जमा करा दिया जाता है तो टीडीएस में देरी पर आपराधिक मामले से छूट मिलेगी। अब सरकार टीसीएस के मामले में भी यह छूट देने पर विचार कर रही है

अपडेटेड Aug 01, 2024 पर 2:16 PM
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जब कोई विक्रेता (Seller) कोई प्रोडक्ट या सर्विस बेचता है तो वह ट्रांजेक्शन के वक्त टैक्स काटता है, जिसे TCS कहा जाता है।

यूनियन बजट में टैक्स के नियमों को आसान बनाने वाले कई प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार ने बजट में टीडीएस फाइलिंग में देरी को अपराध की कैटेगरी से बाहर करने का प्रस्ताव पेश किया है। अब सरकार इसी तर्ज पर टीसीएस फाइलिंग में देरी को भी अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि हम टीसीएस के मामले में भेदभाव खत्म करना चाहते हैं। इसके लिए फाइनेंस बिल में जरूरी संसोधन किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में जल्द फैसला हो जाएगा।

इंडस्ट्री ने टीसीएस के मामले में भी टीडीएस जैसी सुविधा देने की गुजारिश की थी

सरकार ने बजट में टैक्सपेयर्स पर कंप्लायंस का बोझ घटाने के लिए संबंधित तिमाही के लिए टीडीएस रिटर्न फाइल होने तक पेमेंट की इजाजत देने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके बाद इंडस्ट्री ने सरकार से टीसीएस के मामले में भी यह सुविधा देने की गुजारिश की थी। अग्रवाल के बयान के बाद ऐसा लगता है कि सरकार टीसीएस के मामले में भी टीडीएस जैसी सुविधा देने का मन बना रही है।


TDS और TCS का मतलब क्या है?

कंपनी जब किसी व्यक्ति (Individual) को तय सीमा से ज्यादा पेमेंट करती है तो उसे उस पर टैक्स काटना जरूरी होता है, जिसे TDS कहा जाता है। इसी तरह जब कोई विक्रेता (Seller) कोई प्रोडक्ट या सर्विस बेचता है तो वह ट्रांजेक्शन के वक्त टैक्स काटता है, जिसे TCS कहा जाता है। TDS सैलरी, प्रोफेशनल फीस, ब्रोकरेज, कमीशन आदि के पेमेंट पर लागू होता है, जबकि TCS गुड्स या सर्विस की सेल (Sell) पर लागू होता है। टीएसएस का मतलब है टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स, जबकि TCS का मतलब है टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स।

अभी टीडीएस के डिपॉजिट में देरी होने पर क्या कार्रवाई होती है?

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 276B में कहा गया है कि इंडिविजुअल से काटे गए टैक्स को डिपॉजिट करने में देर पर कम से कम तीन महीने की जेल की सजा हो सकती है। अधिकतम 7 साल की जोल और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। टैक्स एडवायजरी फर्म मोरे-सिंघी के डायरेक्टर ओम राजपुरोहित ने कहा, "बजट 2024 में बड़ी राहत देते हुए कहा गया है कि अगर टीडीएस के रूप में काटा गया पैसा तिमाही रिटर्न फाइलिंग तक सरकार के पास जमा करा दिया जाता है तो अपराध वाला सेक्शन लागू नहीं होगा।"

टीडीएस डिपॉजिट के क्या है नियम?

इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। कंपनी एंप्लॉयीज की सैलरी से हर महीने टीडीएस काटती है। उसे अगले महीने की 7 तारीख तक यह पैसा सरकार के पास जमा करना पड़ता है। सिर्फ मार्च का महीना अपवाद है, जब कंपनी को यह पैसा 30 अप्रैल तक जमा कराना पड़ता है। इसके अलावा कंपनी को हर तिमाही टीडीएस का रिटर्न फाइल करना पड़ता है। अभी टीडीएस के पैसे सरकार के पास डिपॉजिट नहीं करने को क्रिमिनल ओफेंस माना जाता है। बजट में कहा गया है कि अगर कंपनी संबंधित तिमाही तक टीडीएस का पैसा सरकार के पास जमा कर देती है तो उसे क्रिमिनल ओफेंस से छूट मिल जाएगी।

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