विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign institutional investors (FII) ने लगातार छठे महीने भारतीय इक्विटी बाजारों में अपनी हिस्सेदारी को बेचना जारी रखा है। उनकी छठे महीने की बिक्री अब तक एक महीने में हुई सबसे बड़ी बिकवाली साबित हो रही है। इन छह महीनों में उनकी शुद्ध बिक्री 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है और पिछले अक्टूबर से अब तक ये 2,06,649 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। मार्च 2020 में COVID महामारी के भारत में पहुंचने के बाद से फरवरी 2022 में FII ने सबसे ज्यादा बिकवाली की है।
इस महीने खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष में FIIs ने 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं।
FIIs की बिकवाली का सिलसिला अक्टूबर में शुरू हुआ था जब बाजार ने अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। फंडामेंटल से आगे चल रहे बाजार के कारण हाई वैल्यूएशन और अमेरिका में 7.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों ने एफआईआई की बिक्री को रोक दिया था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि के कारण कॉर्पोरेट अर्निंग में मार्जिन का दबाव बढ़ा। इसके बाद यूक्रेन-रूस संघर्ष का प्रकोप और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और धातुओं सहित अधिकांश अन्य वस्तुओं ने भी आग में घी का काम किया।
इसके पहले 19 अक्टूबर, 2021 को बाजार ने निफ्टी पर 18,604 और बीएसई सेंसेक्स पर 62,245 की रिकॉर्ड लेवल हासिल किया था। तब से दोनों बेंचमार्क इंडेक्सेस में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
Waterfield Advisors के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर निमिश शाह ने कहा, "भारतीय बाजार पहले से ही अन्य उभरते बाजारों में उच्च प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे। इसलिए वैल्यूएशन के अलावा, ब्याज दर के मूवमेंट ने भी एफआईआई की बिकवाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।"
उन्होंने कहा कि उभरते बाजारों में FII की वापसी काफी हद तक अमेरिका में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी। "हमारा मानना है कि मध्यम अवधि में जैसे-जैसे दर स्थिर होगी और ग्लोबल ग्रोथ आगे बढ़ेगी। तब जाकर FII द्वारा इक्विटी एलोकेशन फिर से शुरू होगा।"
घरेलू संस्थागत निवेशकों (Domestic institutional investors (DIIs) ने अपने विदेशी निवेशकों के विपरीत रुख अपनाया। उन्होंने पिछले छह महीनों में इक्विटी स्पेस में 1.42 लाख करोड़ रुपये का निवेश करके एक मजबूत सपोर्ट और अच्छा विकल्प प्रदान किया है।
यहां तक कि मार्च के पहले कुछ दिनों में जब FII ने 18,615 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिये तो DIIs ने बाजारों में 12,600 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके साथ DIIs ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 1.94 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है।
Geojit Financial Services के वीके विजयकुमार ने कहा "निफ्टी में अपने उच्चतम स्तर से लगभग 13 प्रतिशत के करेक्शन के बावजूद FPIs की बिक्री जारी है। इसके पीछे का कारण युद्ध से उत्पन्न अनिश्चितता और कच्चे तेल में उछाल बाजार में आई उठापटक है। वहीं फरवरी में FPI द्वारा 45,720 रुपये की बिक्री के समक्ष DII द्वारा 42,084 करोड़ रुपये की खरीदारी ने बाजार को बड़े क्रैश से बचा लिया। इस समय एफपीआई और डीआईआई के बीच रस्साकशी चल रही है।"
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