सरकार का चावल के एक्सपोर्ट (Rice Export) पर रोक लगाने का कोई प्लान नहीं है। फूड सेक्रेटरी (Food Secretary) ने सोमवार को इस बारे में बताया। फूड सेक्रेटरी सुधांशु पांडेय ने कहा कि देश में चावल का भरपूर स्टॉक है। इसलिए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं है।
सरकार ने पिछले महीने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। सरकार ने अचानक यह फैसला लिया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि चावल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई जा सकती है। दरअसल, अभी सरकार और RBI तेजी से बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। चीनी के निर्यात के लिए लिमिट तय की गई है। कुछ खाद्य तेलों के आयात पर ड्यूटी घटाई गई है।
पांडेय से यह पूछ गया था कि क्या सरकार चावल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने के बारे में सोच रही है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हमारे पास चावल का जरूरत से ज्यादा स्टॉक है। इसलिए इसके एक्सपोर्ट पर रोक लगाने की कोई योजना नहीं है। इंडिया दुनिया में चावल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है।
पिछले चार महीने से महंगाई (Inflation) RBI के 6 फीसदी के टारगेट से ऊपर बनी हुई है। मार्च में यह 6.95 फीसदी थी। अप्रैल में यह बढ़कर 7.79 फीसदी हो गई। यूक्रेन क्राइसिस के बाद क्रूड सहित कई जिंसों की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर रिटेल इनफ्लेशन पर पड़ा है।
RBI ने तेजी से बढ़ती महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए रेपो रेट में लगातार दूसरे महीने वृद्धि की है। उसने मई में इसे 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया था। फिर 8 जून को 0.50 फीसदी बढ़ाकर 4.90 फीसदी कर दिया।
देश में पिछले साल चावल का उत्पादन बहुत अच्छा रहा था। इस साल भी मानसून सामान्य रहने का अनुमान है। इस वजह से चावल की फसल अच्छी रहने की उम्मीद है। मुख्य चावल उत्पादक राज्यों का मानना है कि इस साल भी फसल के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं।
सरकार चावल के एक्सपोर्ट में दिलचस्पी दिखा रही है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है, जिनमें चावल की खपत ज्यादा है। ऐसे कुछ देशों के साथ बातचीत चल रही है।
फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में इंडिया ने 9.6 अरब डॉलर मूल्य के चावल का निर्यात किया। यह फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में 6.4 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात के मुकाबले ज्यादा था। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में इंडिया ने 8.82 अरब डॉलर मूल्य के चावल का निर्यात किया था।