सरकार टीकाकरण के लिए नई वैक्सीन-कोर्बेवैक्स (Corbevax) और कोवोवैक्स (Covocax) का इस्तेमाल शुरू कर सकती है। अभी सिर्फ इनके इमर्जेंसी इस्तेमाल की इजाजत होगी। दरअसल, देश में टीकाकरण (Vaccination) का नया चरण शुरू होने जा रहा है। इसमें 12 से 14 साल उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाई जाएगी। इस चरण की शुरुआत मार्च से होने की उम्मीद है।
नेशनल टक्निकल एडवायजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (NTAGI) नई वैक्सीन के इस्तेमाल के बारे में 5 फरवरी को फैसला ले सकता है। एनटीएजीआई के प्रमुख एन के अरोड़ा ने बताया था कि 15 से 18 साल के बच्चों को टीका लगाने के बाद अब 12 से 14 साल के बच्चों को टीका लगाने का अभियान मार्च से शुरू हो सकता है।
15 से 18 साल के बच्चों को भारत बायोटेक की कोवैक्सीन लगाई जा रही है। लेकिन, एक सूत्र ने बताया कि कम उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाने के बारे में फैसला साइंटिफिक डेटा और महामारी की स्थिति पर निर्भर करेगा। कोरोना वायरस से लोगों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने पिछले साल देश में वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू किया था। 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्गों को वैक्सीन लगाने के बाद अब बच्चों को टीका लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
एनटीएजीआई के अधिकारियों ने मनीकंट्रोल को बताया कि 5 फरवरी को होने वाली बैठक में सीरम इंस्टीट्यूट और बायोलॉजिकल ई को अपने डेटा पेश करने को कहा गया है। पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट कोवोवैक्स बनाती है। यह अमेरिकी नोवावैक्स का वर्जन है। हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई कोर्बेवैक्स बनाती है। दोनों वैक्सीन का बच्चों पर क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।
नीति आयोग के सदस्य (Health) और कोविड टास्क फोर्स के प्रमुख वी के पॉल ने कहा था कि टीकाकरण अभियान का तुरंत विस्तार नहीं हो सकता है। लेकिन, इसके बारे में विचार हो रहा है।